राजस्थान में 'शुद्ध आहार मिलावट पर वार' अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने जयपुर में हिमालय डेयरी प्रोडक्ट्स की फैक्टरी पर छापा मारा। परिसर में करीब 35 हजार लीटर संदिग्ध घी मिलने और खाद्य लाइसेंस प्रदर्शित नहीं होने पर पूरी फैक्टरी सीज कर दी गई। टीम ने घी और संदिग्ध फ्लेवर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।
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त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे 'शुद्ध आहार मिलावट पर वार' अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जयपुर में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। खाद्य सुरक्षा टीम ने हिमालय डेयरी प्रोडक्ट्स की घी निर्माण एवं पैकेजिंग फैक्टरी पर औचक निरीक्षण करते हुए छापा मारा। निरीक्षण के दौरान फैक्टरी परिसर में करीब 35 हजार लीटर संदिग्ध घी पाया गया। इस गंभीर अनियमितता और खामियों को देखते हुए अधिकारियों ने पूरी फैक्टरी को तुरंत प्रभाव से सीज कर दिया। कार्रवाई के समय फैक्टरी में खाद्य लाइसेंस भी प्रदर्शित किया हुआ नहीं मिला।
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घी के कई नमूने जांच के लिए एकत्र
फैक्टरी के निरीक्षण में खुलासा हुआ कि यहां सात ब्रांडों के नाम से घी की पैकेजिंग की जा रही थी। इनमें राजस्थान सरस, डेयरी ब्रदर्स, श्री किरण सरस, माटुला, चॉइस डेयरी, रघु श्री और गणक शामिल हैं। इसके साथ ही, घी बड़े साइलो में भी भंडारित पाया गया। खाद्य सुरक्षा टीम ने घी के कई नमूने जांच के लिए एकत्र किए। मौके से सफाई केमिकल के नाम पर छिपाकर रखा गया संदिग्ध फ्लेवर भी बरामद हुआ, जिसे टीम ने जब्त कर जांच के वास्ते प्रयोगशाला भेजा है।
तड़के डेयरी व मावा इकाइयों पर दबिश
अभियान के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा दल ने तड़के 3:30 बजे चौमूं क्षेत्र के मोरीजा और चीथवाड़ी स्थित डेयरी तथा मावा इकाइयों पर भी दबिश दी। अधिकारियों ने क्षेत्र के चार प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करके दूध और मावा के विविध नमूने लिए। जांच के दौरान बाबूलाल मावा पनीर उद्योग में पाउडर से मावा बनाने की प्रक्रिया भी अधिकारियों के जांच के दायरे में आई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।