वोट चोरी, एसआईआर और चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के बड़े शहरों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब बॉलीवुड की भागीदारी भी विवाद का नया मुद्दा बन गई है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों की मौजूदगी के बाद करणी सेना के मुंबई अध्यक्ष सुरजीत सिंह राठौड़ ने फिल्मी सितारों और सोशल मीडिया से जुड़े चेहरों पर जमकर निशाना साधा है।
राठौड़ ने आरोप लगाया कि बॉलीवुड का एक वर्ग युवाओं के मुद्दों के लिए नहीं, बल्कि कैमरे, प्रचार, टीआरपी और कथित आर्थिक फायदे के लिए आंदोलनों में पहुंचता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ कलाकारों को आयोजनों में बुलाने के लिए लाखों रुपये तक दिए जाते हैं। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जिन कलाकारों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से इस बातचीत में कोई जवाब सामने नहीं आया है।
'पैसा दो, कलाकार मंच पर पहुंच जाएगा?'
राठौड़ ने दावा किया कि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कलाकार और समूह हैं, जिन्हें अलग-अलग आयोजनों में बुलाया जाता है और इसके लिए कथित तौर पर भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम में लोकप्रिय अभिनेता की मौजूदगी से भीड़ जुटती है, वीडियो बनते हैं और सोशल मीडिया पर कंटेंट वायरल होता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कलाकार वास्तव में युवाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर हैं तो वे हर छात्र आंदोलन में दिखाई क्यों नहीं देते? उनके मुताबिक, शिक्षा, भर्ती, आरक्षण और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कई आंदोलनों में भी युवाओं ने सड़कों पर संघर्ष किया, लेकिन वहां फिल्मी सितारों की मौजूदगी दिखाई नहीं दी।
'कैमरे के सामने आंसू बहाना भी एक्टिंग?'
राठौड़ ने आंदोलन के दौरान कुछ कलाकारों के भावुक होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी अभिनेता का युवाओं से गले मिलना, भावुक होना या कैमरे के सामने आंसू बहाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह उस आंदोलन के मुद्दे को समझता है।
उन्होंने कहा कि अभिनेता का पेशा अभिनय है और इसलिए जनता को यह तय करना होगा कि कैमरे के सामने दिखाई देने वाली भावनाएं वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता हैं या केवल सार्वजनिक प्रदर्शन।
फिल्मी हस्तियों को पाकिस्तान भेजने की कही बात
इसी बातचीत के दौरान राठौड़ ने कुछ फिल्मी हस्तियों पर पाकिस्तान समर्थक रुख रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी कलाकार को पाकिस्तान इतना पसंद है या वह भारत के खिलाफ सोचता है तो उसे भारत में रहने के बजाय पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
राठौड़ ने यहां तक कहा कि ऐसे लोगों के पास पाकिस्तान जाने के टिकट के पैसे नहीं हैं तो वे टिकट का इंतजाम कराने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को परिवार समेत पाकिस्तान भेजने के लिए टिकट की व्यवस्था की जा सकती है। ये टिप्पणियां राठौड़ के आरोपों और बयान का हिस्सा हैं; संबंधित फिल्मी हस्तियों के विचारों या रुख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बॉलीवुड में गुटबाजी और प्रचार पर भी सवाल
राठौड़ ने बॉलीवुड में कथित गुटबाजी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडस्ट्री में कुछ ऐसे समूह हैं, जो राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में अपनी सुविधा के हिसाब से सक्रिय होते हैं।
उनका दावा है कि जब किसी मुद्दे से मीडिया कवरेज मिलने की संभावना होती है तो कुछ कलाकार अचानक सामने आ जाते हैं। वहीं, ऐसे मुद्दे जिनमें कैमरा या व्यापक प्रचार नहीं होता, वहां उनकी मौजूदगी दिखाई नहीं देती।
सोशल मीडिया क्रिएटर्स की भूमिका पर निशाना
राठौड़ ने सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आज का युवा किसी लोकप्रिय चेहरे को देखकर प्रभावित हो जाता है। कोई अभिनेता या चर्चित यूट्यूबर किसी आंदोलन में पहुंचता है तो उसके वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचते हैं। इसके बाद आंदोलन की वास्तविकता से ज्यादा चर्चा उस सेलिब्रिटी की मौजूदगी की होने लगती है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे किसी अभिनेता, यूट्यूबर या राजनीतिक नेता को अपना आदर्श मानने से पहले मुद्दे की पूरी जानकारी हासिल करें। उनके मुताबिक, सोशल मीडिया के दौर में कुछ मिनट का वीडियो किसी व्यक्ति को आंदोलन का चेहरा बना सकता है, लेकिन इससे आंदोलन के दावे सच साबित नहीं हो जाते।
एसआईआर और मतदाता सूची के तथ्यों की जांच करने की अपील
राठौड़ ने युवाओं से एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को खुद पढ़ने और तथ्यों की जांच करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी लोकप्रिय चेहरे की मौजूदगी या सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर किसी मुद्दे के बारे में राय बनाने के बजाय उसके तथ्यों को समझना जरूरी है।