पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों ने फिर दोहराया अपना दर्द
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पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न और असुरक्षा के माहौल से तंग आकर वर्ष 1981 में कई हिंदू परिवारों ने अपना सब कुछ छोड़कर भारत में शरण ली थी। ये परिवार अपनी जमीन-जायदाद, घर और संपत्ति पाकिस्तान में ही छोड़कर भारत आए और शुरुआत में राजस्थान के श्रीगंगानगर क्षेत्र में बसाए गए। कुछ समय बाद बेहतर अवसरों की तलाश में ये परिवार दिल्ली होते हुए जयपुर में आकर बस गए, लेकिन स्थायी पुनर्वास का सपना आज तक अधूरा है।
करीब दो दशक तक अस्थायी जीवन बिताने के बाद वर्ष 2001 में भारत सरकार ने इन परिवारों को भारतीय नागरिकता प्रदान की। नागरिकता मिलने के बाद नियमों के अनुसार इन विस्थापित परिवारों को जमीन आवंटित की जानी थी, ताकि वे स्थायी रूप से बस सकें और अपना जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में विशेष प्रावधान भी किए गए थे, खासकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में भूमि देने की योजना बनाई गई थी।
इसके बावजूद हकीकत यह है कि 40 वर्षों बाद भी ये परिवार जमीन के लिए दर-दर भटक रहे हैं। जानकारी के अनुसार, जैसलमेर जिले के नाचना क्षेत्र में भूमि आवंटन के लिए राज्य सरकार के एक मंत्री द्वारा पत्र भी लिखा गया था, लेकिन उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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अपनी समस्याओं को लेकर पीड़ित परिवार हाल ही में जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां कोई जिम्मेदार पदाधिकारी नहीं मिलने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। परिवारों का कहना है कि सरकार हिंदुओं के हितों की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें बुनियादी अधिकार भी नहीं मिल पा रहे हैं। स्थिति यह है कि कई परिवारों को किराए पर मकान तक नहीं मिल रहा है, जिससे उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी उनके लिए चुनौती बन चुका है।
पीड़ित परिवारों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द उन्हें जमीन आवंटित कर स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि वे न तो पाकिस्तान लौट सकते हैं और न ही भारत में बिना जमीन के सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनका भविष्य अनिश्चित बना रहेगा।