राजस्थान में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और अगले चार से पांच दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अतिभारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट के पास बना अवदाब (लो प्रेशर सिस्टम) अब दक्षिण-पूर्वी झारखंड और उत्तरी ओडिशा के आसपास पहुंच गया है। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से पूर्वी राजस्थान में मानसून और अधिक सक्रिय रहेगा।
मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार 7 से 9 जुलाई के बीच उदयपुर, कोटा और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में कहीं-कहीं अतिभारी बारिश हो सकती है। हालांकि 10 जुलाई से भारी बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई गई है।
इन जिलों में भारी से अतिभारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने आज बांसवाड़ा, बारां, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, सलूंबर और उदयपुर में अतिभारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
इसके अलावा अजमेर, अलवर, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, राजसमंद, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही और टोंक जिलों में भी गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान है।
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पश्चिमी राजस्थान में भी बढ़ेगी बारिश
पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी मानसून सक्रिय रहेगा। बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली, फलौदी और श्रीगंगानगर में 7 और 8 जुलाई को गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।
बारिश ने खोली जयपुर की सड़कों की पोल
मानसून की शुरुआती बारिश ने ही राजधानी में सरकारी इंतजामों की पोल खोल दी। जयपुर में बारिश के चलते कई जगहों पर सड़कें धंस रही हैं। चिंता की बात यह है कि इन गड्ढों में पानी भरने के चलते कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कई सड़कें बीच से तो कई किनारों से इतनी ज्यादा धंस गई हैं कि उनमें पूरा ट्रक समा जाए। ऐस में पैदल चलने वालों से लेकर वाहन चालकों के लिए ये सड़कें अब जान लेवा हो रही हैं।
गोपालपुरा बाइपास पर गंगा-जमुना पेट्रोल पंप और रिद्धि-सिद्धि चौराहे के पास भी 8 से 10 फीट गहरे गड्ढे बन गए। एक स्थान पर सड़क धंसने से खड़ी कार गड्ढे में समा गई। प्रशासन को रातोंरात बैरिकेडिंग कर यातायात डायवर्ट करना पड़ा और मरम्मत शुरू करनी पड़ी। इससे पहले 3 जुलाई को मानसून की पहली बारिश में टोंक रोड भी धंस चुकी थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राजधानी की सड़कों के निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं।