राजस्थान विधानसभा में पेश किए गए बजट को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में जन-सरोकार और जन-भावना का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विगत बजट की अधिकतर घोषणाओं को अभी तक पूरा नहीं किया गया और इस बार फिर से आंकड़ों के मायाजाल में जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया है।
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बाजरे का जिक्र किया, लेकिन सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजस्थान में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाले बाजरे को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीदा ही नहीं जा रहा है। इसके अलावा, पिछले बजट के अनुमान के अनुसार राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाते हुए कहा कि यह बजट केवल राज्य को कर्ज के बोझ में लादने का ही काम करेगा।
पर्यावरण संरक्षण पर सवाल
बजट भाषण में 10 करोड़ पौधे लगाने की घोषणा की गई, लेकिन हनुमान बेनीवाल का कहना है कि राज्य में खेजड़ी सहित अन्य वृक्षों की अंधाधुंध कटाई पर सरकार खामोश है।
कर प्रणाली और महंगाई पर सरकार घिरी
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में महाभारत के शांतिपर्व के श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि "राजा को चाहिए कि परिस्थिति और समय के प्रतिकूल प्रजा पर कर का बोझ न डाले," लेकिन सांसद हनुमान बेनीवाल का दावा है कि सरकार की बिजली कंपनियों द्वारा फ्यूल सरचार्ज के नाम पर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से 1319 करोड़ रुपए की अधिक वसूली की गई है। उन्होंने इसे जनता के साथ छल करार दिया।
महंगाई और खनन नीति पर कोई ठोस कदम नहीं
बजट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी लाने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया गया। इसके अलावा, खनिज नीति में बदलाव कर किसानों को अपनी खातेदारी में छोटे खनन पट्टे देने की मांग को भी नजरअंदाज किया गया है।