राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर केंद्र सरकार और भाजपा को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में परसराम मदेरणा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और धनखड़ का इस्तीफा उसी खतरे की एक और मिसाल है।
गहलोत ने कहा कि धनखड़ साहब खुद कुछ दिन पहले तक कह रहे थे कि वो 2027 तक उपराष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे। उन्होंने तो यहां तक कहा था कि जब तक कोई दैवीय शक्ति न आ जाए, वे पद नहीं छोड़ेंगे। फिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक इस्तीफा दे दिया गया?
गहलोत ने दावा किया कि धनखड़ पूरी तरह स्वस्थ थे और उन्हें किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। उन्होंने कहा कि धनखड़ साहब का स्वास्थ्य बहुत अच्छा था। वो दिनभर काम कर रहे थे। फिर अचानक शाम को इस्तीफा देना देश को चौंकाने वाला कदम था। उन पर क्या कोई दबाव था? ये वे ही जानें या उनकी अंतरात्मा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पहले भी कह चुके हैं कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति दबाव में काम कर रहे हैं और अब यह इस्तीफा इस बात को साबित करता है कि उन पर दबाव था। उन्होंने कहा कि मैंने जोधपुर में कहा था कि वे दबाव में काम करते हैं। इसका जवाब उन्होंने जयपुर में दिया था कि न मैं दबाव में काम करता हूं, न किसी को दबाव में रखता हूं लेकिन अब उनके इस्तीफे से साफ है कि इसमें कहीं न कहीं कोई लिंक है।
यह घटना बताती है कि देश में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम बार-बार कहते रहे हैं कि देश से डेमोक्रेसी खत्म हो रही है। चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है। जांच एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। बिहार में खुलेआम वोटर लिस्ट से वोट काटे जा रहे हैं। महाराष्ट्र में एकतरफा जीत दिलाई जा रही है।
गहलोत ने इसके लिए जनता को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सिर्फ राजनीतिक दलों के प्रयास से कुछ नहीं होगा। जब तक आम लोग आगे नहीं आएंगे, तब तक आरएसएस और बीजेपी की दादागिरी चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि सच्चाई विपक्ष के साथ है, तो जनता को उसका साथ देना चाहिए। नहीं तो देश को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
धनखड़ के इस्तीफे पर कांग्रेस के रुख को लेकर गहलोत ने कहा कि कांग्रेस का स्टैंड पहले भी सही था, अब भी सही है। यह संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़ा मामला है। जिस तरह से इस्तीफा हुआ, उस पर हमें आपत्ति है। इसका कोई बेहतर तरीका निकाला जा सकता था।
अध्यक्ष और सभापति की भूमिका पर बात करते हुए गहलोत ने कहा कि विपक्ष हमेशा स्पीकर से निष्पक्षता की उम्मीद करता है लेकिन कई बार स्पीकर पार्टी लाइन से हट नहीं पाते। उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्षों सीपी जोशी और परसराम मदेरणा की निष्पक्षता की सराहना की।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से रूबरू पूर्व मुख्यमंत्री