राजस्थान अकादमी नई दिल्ली की ओर से बुधवार को राजधानी के एवं ए. गालव ऑडिटोरियम, आईटीओ में भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भरतपुर जिले के बयाना कस्बे के मूल निवासी योगेश कुमार भावरा को प्रतिष्ठित ‘नवा सुभाष लखोटिया श्रवण कुमार पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान एक लाख रुपये नकद, प्रशस्ति पत्र, शॉल और पुष्पगुच्छ प्रदान कर दिया गया।
पुरस्कार प्रदान करने वालों में श्रीलंका की भारत में उच्चायुक्त प्रदीपा महेशनी कोलोन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ तिमोर लेस्ते के भारत में राजदूत कारलीतो न्यूनस, यूनियन ऑफ कोमोरोस के भारत स्थित प्रेसीडेंट काउंसल जनरल के.एल. गंजू, राजस्थान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता, सचिव सुमन माहेश्वरी और पद्मश्री संगीतज्ञ नलिनी एवं कमलिनी शामिल रहे।
लोकनृत्यों और कला प्रदर्शनी ने मोहा मन
कार्यक्रम में तेतीसवीं राजस्थानी लोकनृत्य प्रतियोगिता और ग्यारहवीं चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। दिल्ली एनसीआर के 20 से अधिक स्कूलों के विद्यार्थियों ने राजस्थानी लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि बीते तीन दशकों में अकादमी ने 500 से अधिक स्कूलों के करीब 10,000 कलाकारों को मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि इस मंच से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान नेताओं ने भी कलाकारों को प्रोत्साहित किया था।
विदेशी अतिथियों ने सराही भारतीय संस्कृति
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रदीपा महेशनी कोलोन ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। उन्होंने राजस्थान की संस्कृति, लोकनृत्य और भोजन की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और विविधता उन्हें सदैव प्रेरित करती है।
तिमोर लेस्ते के राजदूत कारलीतो न्यूनस ने कहा कि भारत और तिमोर के द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उनके देश के युवा भारतीय बॉलीवुड फिल्मों और कलाकारों के प्रशंसक हैं। वहीं यूनियन ऑफ कोमोरोस के प्रेसीडेंट काउंसल जनरल के.एल. गंजू ने कहा कि योगेश कुमार भावरा ने अपने वृद्ध स्वतंत्रता सेनानी पिता की सेवा कर आदर्श प्रस्तुत किया है और बतौर पत्रकार वे पहले ही समाज में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
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‘पिता की सेवा हर पुत्र का धर्म’
पुरस्कार ग्रहण करते हुए योगेश कुमार भावरा ने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि राजस्थान अकादमी तीन दशकों से राजस्थानी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में जो कार्य कर रही है, वह वंदनीय है। भावरा ने कहा कि अपने पिता से मिले संस्कारों और प्रेरणा के साथ वे आगे भी समाज और देश की सेवा करते रहेंगे।
अकादमी के निरंतर प्रयासों की सराहना
कार्यक्रम में राजस्थान अकादमी के विशेष, स्थायी और अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालन अकादमी की सचिव सुमन माहेश्वरी ने किया। समारोह के दौरान राजस्थानी संस्कृति, कला और लोकनृत्य की जीवंत झलकियों ने सभी का मन मोह लिया।
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