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फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट मामला: एसओजी ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले एक और डॉक्टर को किया गिरफ्तार

Mon, 06 Jul 2026 04:36 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

एसओजी ने फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट के आधार पर मेडिकल रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने वाले एक और डॉक्टर को गिरफ्तार किया। अब तक इस प्रकरण में 28 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

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कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने वाले एक और डॉक्टर गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने फर्जी एफएमजीई (Foreign Medical Graduate Examination) सर्टिफिकेट के आधार पर मेडिकल रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में एक और डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित तौर पर 24 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र बनवाया और उसी के आधार पर इंटर्नशिप पूरी कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीकरण कराया।
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एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थियों के भारत में मेडिकल प्रैक्टिस से पहले अनिवार्य एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के मामले में एसओजी थाने में 4 फरवरी 2026 को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

जांच के दौरान सामने आया कि कई विदेशी मेडिकल स्नातकों ने एफएमजीई परीक्षा पास किए बिना फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराए और मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों एवं अधिकारियों की कथित मिलीभगत से राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर अस्थायी पंजीकरण हासिल कर लिया।
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100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान

महानिरीक्षक पुलिस अजयपाल लांबा, उपमहानिरीक्षक भुवन भूषण यादव और पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के निर्देशन में चल रही जांच में अब तक 100 से अधिक ऐसे विदेशी मेडिकल स्नातकों की पहचान की जा चुकी है, जिन पर फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र का इस्तेमाल करने का संदेह है। इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित अब तक कुल 28 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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कजाकिस्तान से की थी एमबीबीएस

ताजा कार्रवाई में एसओजी ने डीग जिले के गोपालगढ़ निवासी चरण सिंह (27) को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार उसने वर्ष 2017 से 2022 के बीच कजाकिस्तान के अल्माटी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई की। भारत लौटने के बाद उसने कई बार एफएमजीई परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो सका।

पुलिस के अनुसार इसके बाद आरोपी ने अपने परिचित नफीस खान के माध्यम से 24 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र तैयार कराया। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज, धौलपुर में इंटर्नशिप की और आगे मेडिकल पंजीकरण भी हासिल कर लिया।

मुख्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार

एसओजी के अनुसार नफीस खान ने भी कथित तौर पर अपना फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र तैयार कराया था और मई 2024 में तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा की मिलीभगत से प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन प्राप्त किया था।

इस प्रकरण में पहले ही फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर इंटर्नशिप और पंजीकरण कराने वाले 23 डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली तथा एक दलाल को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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20 से 30 लाख रुपये लेकर बनते थे फर्जी प्रमाणपत्र

जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर कथित तौर पर प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र तैयार करवाते थे और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने की पूरी व्यवस्था करते थे। एसओजी का कहना है कि मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


 
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