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Rajasthan News:खेजड़ी से अरावली, चंबल से जोजरी तक; ढाई साल में पर्यावरण रहा राजस्थान का सबसे बड़ा मुद्दा

Fri, 05 Jun 2026 04:28 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

विश्व पर्यावरण दिवस पर राजस्थान में खेजड़ी कटाई, अरावली में अवैध खनन, चंबल में बजरी माफिया और जोजरी-लूणी प्रदूषण बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं। कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी।

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अरावली क्षेत्र - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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सड़क, विधानसभा और अदालत तक गूंजे पर्यावरण के सवाल; कई मामलों में सरकार को न्यायिक हस्तक्षेप के बाद उठाने पड़े कदम
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एक पेड़ मां के नाम और हरियालो राजस्थान जैसी योजनाओं के सहारे खुद को पर्यावरण हितैशी बताने वाली राजस्थान की भजनलाल सरकार को बीते ढाई वर्षों में इन्हीं मुद्दों पर सबसे ज्यादा विरोध का सामाना करना पड़ा है। विरोध का स्तर सिर्फ राजनीति तक ही सीमित नहीं रहा बल्की कई मामलों में शीर्ष अदालत को भी दखल देना पड़ा है। खेजड़ी के पेड़ों की कटाई, अरावली में अवैध खनन, चंबल अभयारण्य में बजरी माफिया और जोजरी-लूणी नदी में प्रदूषण जैसे मुद्दे लगातार सुर्खियों में रहे हैं। इन मुद्दों पर राज्य सरकार को जन विरोध के चलते कई बार बैकफुट पर भी आना पड़ा। 

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खेजड़ी बचाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों की पहचान माने जाने वाले खेजड़ी वृक्षों की कटाई को लेकर सबसे व्यापक जनविरोध देखने को मिला। बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर और नागौर सहित कई जिलों में सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीण समुदायों ने विरोध प्रदर्शन किए। आंदोलन बढ़ने के बाद सरकार को विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण कानून लाने की घोषणा करनी पड़ी।
यह भी पढें- Rajasthan News: सरकारी ऑनलाइन काम पर साइबर खतरा, अलर्ट के बाद विभाग ने जारी किए निर्देश

अरावली विवाद : राजस्थान में क्या हुआ?

राजस्थान में अरावली पर्वतमाला को लेकर पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और खनन गतिविधियों के बीच संघर्ष जारी है। अलवर, जयपुर, सीकर और झुंझुनूं सहित कई जिलों में अवैध खनन, पहाड़ों की कटाई और वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। इस मुद्दे पर पर्यावरण संगठनों ने आंदोलन किए, जबकि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर सख्त टिप्पणियां और निर्देश जारी किए। विपक्ष ने सरकारों पर खनन माफिया के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए, वहीं सरकारों का कहना रहा कि अवैध खनन रोकने के लिए लगातार अभियान, जब्ती और निगरानी की कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद अरावली संरक्षण का मुद्दा राजस्थान की राजनीति, पर्यावरण और विकास से जुड़ा एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।

चंबल अभ्यारण्य में अवैध खनन, सु्प्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और उससे वन्यजीवों को हो रहे नुकसान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कई बार फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि केवल हलफनामे और योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीन पर वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य प्रशासन की कार्रवाई अक्सर न्यायिक दबाव के बाद ही तेज होती है।

हालांकि मई 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के प्रयासों की सराहना भी की और कहा कि अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए राज्य द्वारा विकसित किया जा रहा मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए “रोल मॉडल” बन सकता है, बशर्ते इसका असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखे।
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जोजरी नदी: प्रदूषण पर कोर्ट की निगरानी

जोजरी-लूणी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- क्या CBI जांच कराएं?

राजस्थान की जोजरी और लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जोजरी नदी में 4 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए उद्योगों का प्रदूषित पानी छोड़े जाने पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर यह सब कौन होने दे रहा है और क्या मामले की CBI जांच कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित समिति ने 27 मई को निरीक्षण के दौरान इस अवैध पाइपलाइन का खुलासा किया था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी डिस्चार्ज प्रणाली अधिकारियों की जानकारी के बिना कैसे संचालित होती रही। मामले के सामने आने के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक क्षेत्रीय अधिकारी को एपीओ तथा दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में एसआईटी गठित की जाएगी। सरकार ने कहा कि जांच के लिए फिलहाल सीबीआई की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य स्तर पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

 
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