राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर की ओर से 25 दिसंबर 2022 को आयोजित शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाकर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। एसओजी ने परीक्षा में डमी अभ्यर्थी के रूप में बैठने वाले बीरबल राम विश्नोई को गिरफ्तार कर पुलिस अभिरक्षा में लिया है। मामले में उसका भाई सुरेश विश्नोई पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
सगे भाई की जगह परीक्षा देने पहुंचा था बीरबल राम
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 के लिए सुरेश विश्नोई पुत्र आसू राम, निवासी राजीव नगर, पुर, थाना सांचौर, जिला जालौर ने आवेदन किया था। जांच के दौरान सामने आया कि सुरेश विश्नोई ने भर्ती परीक्षा में खुद शामिल होने के बजाय अपने सगे छोटे भाई बीरबल राम विश्नोई को अपनी जगह डमी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा देने के लिए भेजा था। जांच के अनुसार, बीरबल राम ने सुरेश विश्नोई के स्थान पर परीक्षा दी। इसके बाद सुरेश विश्नोई परीक्षा में सफल हुआ और सरकारी शारीरिक शिक्षक के पद पर चयनित होकर नौकरी हासिल कर ली।
शिकायत के बाद एसओजी ने शुरू की जांच
मामले में शिकायत मिलने के बाद एसओजी ने जांच शुरू की। जांच के आधार पर पुलिस थाना एसओजी, जयपुर में प्रकरण संख्या 20/2025 दर्ज किया गया और अनुसंधान शुरू किया गया। जांच के दौरान परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थी के रूप में शामिल सुरेश विश्नोई और उसकी जगह डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने वाले व्यक्ति की भूमिका सामने आई। एसओजी ने इस मामले में वास्तविक अभ्यर्थी सुरेश विश्नोई को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। अब उसके सगे छोटे भाई बीरबल राम पुत्र आसू राम विश्नोई को भी गिरफ्तार किया गया है।
एसओजी के अनुसार, गिरफ्तार बीरबल राम विश्नोई की उम्र 26 वर्ष है। वह राजीव नगर, पुर, थाना सांचौर, जिला जालौर का रहने वाला है। एसओजी ने गिरफ्तारी के बाद बीरबल राम को पुलिस अभिरक्षा में लिया है।
डमी अभ्यर्थी से लेकर नौकरी हासिल करने तक की जांच
अब जांच एजेंसी पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। एसओजी भर्ती परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाने की पूरी प्रक्रिया, परीक्षा केंद्र पर बीरबल राम की उपस्थिति और परीक्षा में सफलता के बाद सुरेश विश्नोई के सरकारी शारीरिक शिक्षक के पद पर चयन तथा नौकरी हासिल करने से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई अनुसंधान के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।