राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने वसुंधरा राजे को "दुखी आत्मा" बताते हुए कहा कि उनके 'दोस्ती-दुश्मनी' वाले बयान भाजपा के भीतर चल रही खींचतान और षड्यंत्रों का परिणाम हैं। हालांकि, उन्होंने राजनीति में कटुता नहीं रखने की राजे की बात का समर्थन भी किया।
डोटासरा ने कहा कि जब विधानसभा के अमृत महोत्सव कार्यक्रम में वसुंधरा राजे बोल रही थीं, तब उनकी नजरें कभी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तो कभी पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की ओर जा रही थीं। उनके अनुसार, यह साफ संकेत था कि राजे अपनी ही पार्टी के भीतर चल रही परिस्थितियों की ओर इशारा कर रही थीं।
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डोटासरा ने कहा कि "वसुंधरा राजे दुखी आत्मा हैं। उनके साथ जो व्यवहार हुआ है और जिस तरह उनकी ही पार्टी में उनके खिलाफ षड्यंत्र रचे गए हैं, उसी पीड़ा की झलक उनके भाषण में दिखाई दी।" उन्होंने कहा कि भाजपा के अंदर की खींचतान अब सार्वजनिक मंचों पर भी दिखाई देने लगी है।
हालांकि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत कटुता नहीं होनी चाहिए और इस संबंध में वसुंधरा राजे की बात से वह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में मर्यादा बनी रहनी चाहिए।
डोटासरा ने इस दौरान राज्य सरकार की तबादला नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जरूरतमंद कर्मचारियों के तबादले नहीं हो रहे, जबकि प्रभावशाली लोगों को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है। उनका दावा था कि भाजपा के कई कार्यकर्ता और नेता भी तबादला सूची से नाराज हैं।