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Rajasthan OTP Fraud: सावधान ! जीवन प्रमाण अपडेट के नाम पर किसी से न करें ये डिटेल साझा, ये साइबर फ्रॉड है

Tue, 28 Oct 2025 07:23 AM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर

सार

राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने पेंशन धारकों को चेताया है कि जालसाज जीवन प्रमाण अपडेट के नाम पर ओटीपी लेकर खातों से पैसे उड़ा रहे हैं। पुलिस ने कहा—पेंशन निदेशालय कभी कॉल नहीं करता, जानकारी या ओटीपी साझा न करें और केवल आधिकारिक साइट पर अपडेट करें।

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साइबर फ्रॉड
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विस्तार
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सवधान! अगर आप राज्य सरकार के पेंशनर हैं और आपके जीवन प्रमाण पत्र को अपडेट करने के लिए आपके पास ओटीपी देने का कॉल आ रहा है तो तुंरंत साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें। यह कॉल साइबर फ्रॉड का है जो ओटीपी देते ही आपके खाते को साफ करने में पल भर की भी देरी नहीं लगाएगा।
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राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और आमजन में जागरूकता लाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। यह सलाह पेंशन धारकों को संभावित साइबर अपराध से सचेत करने के लिए दी जाती है, क्योंकि आजकल साइबर अपराधियों द्वारा पेंशन निदेशालय से जुड़े जीवन प्रमाण पत्र को ऑनलाइन अपडेट करने के बहाने नई तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है।
 उपमहानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि जालसाज स्वयं को पेंशन कार्यालय या संबंधित विभाग का कर्मचारी बताते हुए पेंशन धारकों को कॉल करते हैं। वे पहले पेंशन धारकों से उनकी नियुक्ति, सेवानिवृत्ति दिनांक, पीपीओ नंबर, आधार कार्ड संख्या, स्थायी पता, मासिक पेंशन और नॉमिनी जैसी पूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं। 
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डेटा प्राप्त करने के बाद वे पेंशन धारकों को उनका जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने का झांसा देते हैं और उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को तुरंत साझा करने के लिए कहते हैं। एक बार जब पेंशन धारक ओटीपी साझा कर देते हैं, तो साइबर ठग उन्हें फर्जी लिंक या ऐप (जैसे AnyDesk या QuickSupport) भेजकर उनके मोबाइल/लेपटॉप/कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस ले लेते हैं। रिमोट एक्सेस मिलते ही, जालसाजों को पेंशन धारक के बैंक खाते का डायरेक्ट एक्सेस मिल जाता है, जिसके बाद वे खाते में जमा समस्त राशि को तुरन्त दूसरे फर्जी बैंक खातों या वॉलेट में स्थानांतरित कर देते हैं।

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 नागरिकों के लिए सुरक्षा उपाय 
पेंशन धारकों को यह हमेशा याद रखना चाहिए कि पेंशन निदेशालय कभी भी किसी भी पेंशन धारक को उनका जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपडेट करने के लिए कॉल नहीं करता है और न ही स्वयं ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करता है।  ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने की प्रक्रिया केवल अधिकृत ई-मित्र केंद्रों द्वारा ही की जाती है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल करने वाले व्यक्ति को अपनी बैंक जानकारी, ओटीपी, या पेंशन आईडी कभी भी साझा न करें। जीवन प्रमाण पत्र केवल अधिकृत वेबसाइट (https://jeevanpramaan.gov.in) पर ही जमा करें और किसी भी अनजान लिंक या मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता का पूरी तरह सत्यापन करें। किसी भी अंजान कॉल पर यदि दबाव बनाया जाए या डराया जाए तो तुरंत कॉल काट दें।
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     डीआईजी शर्मा ने बताया कि यदि किसी पेंशन धारक के साथ इस प्रकार की घटना होती है, तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन/साइबर पुलिस स्टेशन, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/, साइबर हेल्प लाईन नम्बर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930/9257510100 पर देनी चाहिए। 
 
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