कांग्रेस विधायक सुबह 8:45 बजे विधायक आवास स्थित लॉन में एकत्र होंगे। यहां पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक सरकार की नीतियों के खिलाफ विधानसभा तक पैदल मार्च करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा है कि आगामी पंचायत और निकाय चुनाव धर्म और जाति के बजाय सरकार के कामकाज के आधार पर लड़कर दिखाए। उनका आरोप है कि भाजपा अपने काम के बजाय ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा ले रही है।
‘मीडिया वर्क फ्रॉम होम करेगा क्या?’
सरकारी स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर रोक को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा बनाया है। जूली ने सवाल उठाया कि सरकारी स्कूलों की कमियां सामने लाने से रोकने के लिए मीडिया पर पहरा क्यों लगाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब मीडिया ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेगा। कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाकर सरकार से संबंधित आदेश वापस लेने की मांग करेगी।
BJP का प्लान- सरकार के काम का हिसाब सदन में
कांग्रेस के हमले के जवाब में भाजपा ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक लेकर विधायकों को विधानसभा में सक्रिय रहने और सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विधायकों से विपक्ष के आरोपों का मजबूती से जवाब देने और आमजन से जुड़े मुद्दों पर सरकार का पक्ष तथ्यों के साथ रखने को कहा। भाजपा का फोकस विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं, भर्ती और पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार से तुलना करने पर रहेगा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक 410 परीक्षाएं बिना पेपर लीक के आयोजित की गई हैं। करीब 1.89 लाख पदों पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, जबकि 1.22 लाख से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है और 70 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है।
10 लौटाए गए विधेयक भी बनेंगे टकराव का मुद्दा
सत्र के दौरान राजभवन से पुनर्विचार के लिए लौटाए गए 10 विधेयक भी सरकार और विपक्ष के बीच बहस का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। सरकार इन विधेयकों को दोबारा सदन में रखेगी। इसके अलावा सत्र शुरू होने से पहले करीब 1490 सवालों के जवाब लंबित हैं। कांग्रेस इसे लेकर सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाएगी। वहीं सत्र की अवधि को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं। जूली सत्र को 15 से 25 दिन तक चलाने की मांग कर चुके हैं, जबकि सरकार की ओर से सत्र 25 अगस्त तक चलने के संकेत दिए गए हैं।