Rajasthan: यदि किरोड़ी लाल मीणा का बयान असत्य था, तो मुख्यमंत्री ने 7 फरवरी को सदन के पटल पर इसे खारिज क्यों नहीं किया? यह मामला स्पष्ट रूप से संदेहास्पद है और इसमें "दाल में कुछ काला" नजर आता है। ऐसा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा है।
प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर गहराता विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मुख्यमंत्री विधानसभा के पटल पर कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बयान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं करेंगे, विपक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने देगा।
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इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब 7 फरवरी को गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने मीडिया के सामने बयान दिया कि उन्होंने किरोड़ी लाल मीणा का ऐसा कोई बयान नहीं सुना है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किरोड़ी लाल मीणा को नोटिस जारी करते हुए उनके बयान को असत्य बताया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि यदि किरोड़ी लाल मीणा का बयान असत्य था, तो मुख्यमंत्री ने 7 फरवरी को सदन के पटल पर इसे खारिज क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से संदेहास्पद है और इसमें "दाल में कुछ काला" नजर आता है।
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फोन टैपिंग का आरोप
विपक्ष ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बजरी घोटाले के आरोपों के बाद से भाजपा किरोड़ी लाल मीणा के पीछे पड़ी हुई है। जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मीणा का फोन टैप करवा रही है ताकि यह पता चल सके कि उनके पास कौन सी गुप्त जानकारियां पहुंच रही हैं।
राजनीतिक हलचल तेज
इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। जहां विपक्ष आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं भाजपा भी इस मामले में अपने रुख पर अड़ी हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री इस मामले में सदन के पटल पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।