भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के बीच न्याय व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मीडिएशन को पूरी तरह एआई आधारित सॉफ्टवेयर के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि एआई इंसानों जैसी आवाज तो दे सकता है, लेकिन उसमें मानवीय संवेदनाएं, सहानुभूति और क्षमा का भाव नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऑनलाइन मीडिएशन का संचालन मुख्य रूप से प्रशिक्षित मध्यस्थों द्वारा ही किया जाना चाहिए।
'एआई नहीं समझ सकता इंसानी भावनाएं'
जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस, मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक और ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली कॉमनवेल्थ देशों के दूरदराज क्षेत्रों तक मीडिएशन सेवाएं पहुंचाने में बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक केवल सहयोगी की भूमिका निभा सकती है, इंसानी भूमिका की जगह नहीं ले सकती।
उन्होंने कहा, 'एआई मानव जैसी आवाज तो दे सकता है, लेकिन वह सहानुभूति और माफी जैसी मानवीय भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकता। इसलिए ऑनलाइन मीडिएशन प्रशिक्षित मध्यस्थों द्वारा ही संचालित होना चाहिए।'
'मीडिएशन को मुकदमेबाजी से कमतर न समझें'
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि मीडिएशन को अदालतों से कमतर व्यवस्था मानना बंद किया जाए। उनके अनुसार, मीडिएशन और न्यायालय दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं। उन्होंने कहा कि अदालत अंतिम निर्णय देती है, जबकि मीडिएशन पक्षों को आपसी सहमति से समाधान खोजने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि शांति और कानून को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जा सकता। 'शांति, कानून की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।'
गांव की पंचायत का दिया उदाहरण
अपने संबोधन में सीजेआई सूर्यकांत ने हरियाणा के गांव में बिताए बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि पहले गांवों में विवादों का समाधान पेड़ के नीचे बैठकर बुजुर्गों की मौजूदगी में बातचीत से हो जाता था। उस समय इसे वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली नहीं कहा जाता था, बल्कि यह गांव की पंचायत थी, जो आज के मीडिएशन की मूल भावना को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का वास्तविक समाधान तभी माना जाएगा, जब फैसला होने के बाद भी दोनों पक्ष सामान्य संबंध बनाए रख सकें। 'असली शांति वही है, जब विवाद खत्म होने के बाद भी पड़ोसी अगले दिन साथ बैठकर चाय पी सकें।'
52 देशों के न्यायविद जयपुर में जुटे
देश और दुनिया में वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में जयपुर शुक्रवार से अंतरराष्ट्रीय न्यायिक विमर्श का केंद्र बन गया। यहां आयोजित तीन दिवसीय कॉमनवेल्थ पीस, मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने किया। सम्मेलन में 52 कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, अटॉर्नी जनरल, वरिष्ठ अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
यह भी पढ़ें:
महानदी में उफान से बाढ़ जैसे हालात! कई गांवों में अलर्ट, मकान खाली कराने लगी प्रशासन की टीम
राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता केवल विवाद निपटाने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और न्यायपालिका में लोगों के विश्वास को मजबूत करने का प्रभावी उपकरण है। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय सम्मेलन में इसी सोच को आगे बढ़ाने पर व्यापक चर्चा होगी। जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था केवल न्याय देने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाली सहभागी व्यवस्था बनना होगा।