पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने और लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पेंशन राशि के लिए 50-50 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी का प्रस्ताव भी रखा है। गहलोत ने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि महंगाई के दौर में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन में तत्काल वृद्धि की जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों के दौरान बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं के लिए वर्ष 2013 तक केंद्रीय पेंशन राशि 300 रुपये प्रतिमाह थी। आरोप है कि इसके बाद बीते 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने इस राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की।
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गहलोत ने कहा कि इस दौरान महंगाई लगातार बढ़ती रही, लेकिन पेंशन राशि और लाभार्थियों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। संसद की स्थायी समिति ने भी इस राशि को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा सकते हैं, लेकिन गरीबों की पेंशन बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गरीब परिवारों का सहारा बने सरकार
अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने 500 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन शुरू की थी। इसके बाद भाजपा सरकार के कार्यकाल में पांच वर्षों तक पेंशन राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर 750 रुपये की गई और वर्ष 2023 में इसे 1000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इसके साथ ही भविष्य में पेंशन राशि को लंबे समय तक स्थिर न रखा जा सके, इसके लिए हर वर्ष 15 प्रतिशत स्वतः वृद्धि का कानूनी प्रावधान भी किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के पास अधिक संसाधन हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को 50-50 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी के साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करना चाहिए, ताकि गरीब, बुजुर्ग, दिव्यांग और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके।