Jaipur: जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने नगर निगम के एक स्वास्थ्य निरीक्षक और एक निजी व्यक्ति को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि परिवादी की तनख्वाह जारी करने के बदले हर महीने रिश्वत मांगी जा रही थी। एसीबी ने शिकायत के सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच जारी है।
जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम के स्वास्थ्य निरीक्षक और एक निजी व्यक्ति को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामला जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 99 से जुड़ा हुआ है, जहां परिवादी की सैलरी जारी करने के बदले हर महीने रिश्वत मांगी जा रही थी।
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एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई में पकड़ा
एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर एसीबी जयपुर नगर-द्वितीय इकाई ने गुरुवार को ट्रैप कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य निरीक्षक दिनेश कुमार और निजी व्यक्ति प्रकाश चंद को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने मिलीभगत कर परिवादी की मार्च 2026 की तनख्वाह जारी करने की एवज में प्रतिमाह 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के बाद हुआ सत्यापन
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान आरोपियों द्वारा रिश्वत लेने की बात सही पाई गई। इसके बाद उप महानिरीक्षक पुलिस-द्वितीय ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन में कार्रवाई की योजना बनाई गई।
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अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
एसीबी टीम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र के नेतृत्व और पुलिस उप अधीक्षक अभिषेक पारीक की मौजूदगी में ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य निरीक्षक दिनेश कुमार और प्रकाश चंद को परिवादी से 5 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
निजी व्यक्ति निभा रहा था मध्यस्थ की भूमिका
बताया गया कि प्रकाश चंद रेलवे स्टेशन के पास स्थित वार्ड कार्यालय के आसपास दुकान संचालित करता है और रिश्वत राशि के लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की जा रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
एसीबी अधिकारियों के अनुसार मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि रिश्वतखोरी का यह नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
नगर निगम व्यवस्था पर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद नगर निगम व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह जारी करने जैसे नियमित कार्य के लिए रिश्वत मांगने की घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।