पुलिस के द्वारा जारी किया गया फोटो
- फोटो : Amar Ujala
राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। हालांकि 63 सदस्यीय नई टीम सामने आते ही संगठन के भीतर और राजनीतिक गलियारों में चयन प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यकारिणी में कई नेता पुत्रों और विवादों से जुड़े चेहरों को जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं महिलाओं की सीमित भागीदारी ने भी बहस छेड़ दी है।
नेता पुत्रों को मिली अहम जिम्मेदारियां
नई कार्यकारिणी में दिव्यांश भारद्वाज को प्रदेश मंत्री बनाया गया है। वे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूर्व ओएसडी महेंद्र भारद्वाज के पुत्र हैं और टोंक जिले के आवां गांव के सरपंच भी हैं। इसी तरह सीकर के भाजपा नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सिंघानिया के बेटे आदित्य सिंघानिया को भी प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अजमेर के प्रभावशाली भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा के पुत्र शिवराज सिंह पलाड़ा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनकी मां सुशील कंवर मसूदा से विधायक रह चुकी हैं।
विवादित चेहरे को जिम्मेदारी देने पर चर्चा
कार्यकारिणी में सबसे ज्यादा चर्चा बीके कुशवाह को प्रदेश मंत्री बनाए जाने को लेकर हो रही है। वर्ष 2022 में वे देशी कट्टा और कारतूस के साथ गिरफ्तारी के मामले में चर्चाओं में आए थे। धौलपुर के सदर थाने में दर्ज मामले में अब तक कोर्ट में चालान पेश नहीं हुआ है।
हाल ही में उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वे कथित रूप से पत्थराव करते नजर आए थे। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। हालांकि भाजपा प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी ने कहा कि संबंधित प्रकरण में एफआईआर हो चुकी है और उसी आधार पर संगठन ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है।
महिलाओं की कम भागीदारी पर उठे सवाल
नई कार्यकारिणी में महिलाओं की भागीदारी भी सवालों के घेरे में है। मुख्य पदों पर किसी महिला को जगह नहीं मिली। केवल निकिता शेखावत, ट्विंकल शर्मा और वृंदा राठौड़ को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसको लेकर विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक भाजपा की “नारी शक्ति वंदन” नीति पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के दावों के बावजूद संगठनात्मक ढांचे में महिलाओं की मौजूदगी बेहद सीमित दिखाई दे रही है।
नए चेहरों को मौका देने का दावा
हालांकि, संगठन की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया जा रहा है। नई कार्यकारिणी में करीब 90 प्रतिशत नए चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें बड़ी संख्या एबीवीपी और छात्र राजनीति से जुड़े कार्यकर्ताओं की बताई जा रही है। इसके बावजूद एबीवीपी के कई चर्चित नामों को सूची में जगह नहीं मिलने से संगठन के भीतर असंतोष और चर्चाओं का दौर जारी है।