कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बीजेपी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डोटासरा ने कहा कि बीजेपी ने 14 जनवरी को रातोंरात फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए नाम जोड़ने और हटाने के हजारों फार्म एसडीओ कार्यालयों में जमा करवा दिए। इन फार्मों पर न तो बीएलओ के हस्ताक्षर हैं और न ही मोबाइल नंबर दर्ज हैं। उन्होंने दावा किया कि हर विधानसभा में एक हजार से लेकर सात हजार तक फार्म अचानक पहुंचाए गए, जो सीधे बीजेपी कार्यालय से भरवाए गए थे।
डोटासरा ने कहा कि अमित शाह और बीएल संतोष के जयपुर दौरे के बाद बीजेपी ने अपने मंत्रियों और नेताओं को कांग्रेस समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का टास्क दिया है। सीएमआर से पेन ड्राइव के जरिए डेटा दिया गया और पहले से प्रिंटेड फार्म तैयार कर सीधे एसडीओ कार्यालयों में जमा करवाए गए। एक बूथ पर 50-50 नाम जोड़ने और कांग्रेस समर्थित वोटरों के नाम काटने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी डेटा माइनिंग के जरिए तानाशाही रवैया अपना रही है। सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों, सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वालों और आंदोलनों से जुड़े लोगों का विधानसभा-वार डेटा तैयार कर उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश रची जा रही है। डोटासरा ने कहा कि कई अधिकारी इस दबाव से परेशान हैं और खुद स्वीकार कर रहे हैं कि नियमों के तहत ही जांच के बाद नाम जोड़े या हटाए जाएंगे।