सूखा, अनियमित बारिश और बदलते मौसम ने देश में खेती-किसानी की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। इसके बावजूद छोटे किसान इन मुश्किलों से निपटने के लिए आय के दूसरे साधन अपना रहे हैं। सीमित जमीन होने के कारण कई किसान पशुपालन, मजदूरी और छोटे कारोबार के जरिए अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। साथ ही, फसल बीमा, बैंक ऋण और सरकारी रोजगार योजनाओं का सहारा लेकर मौसम की मार से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
सीमित जमीन में खेती करना बड़ी चुनौती
छोटे किसानों के सामने सीमित जमीन पर उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई की व्यवस्था करने और नई तकनीक अपनाने के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना बड़ी चुनौती है। मौसम खराब होने पर फसल को नुकसान पहुंचता है, जिससे परिवार की आमदनी भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में किसानों को खेती के साथ-साथ आय के दूसरे विकल्प तलाशने पड़ते हैं। कई किसान पशुपालन के जरिए कमाई कर रहे हैं, जबकि कुछ मजदूरी या छोटे कारोबार के सहारे परिवार का खर्च चला रहे हैं। आय के एक से अधिक साधन होने से किसानों को खेती में नुकसान होने पर आर्थिक जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
बीमा और कर्ज से मिलती है राहत
मौसम की मार से निपटने में फसल बीमा, बैंक ऋण और सरकारी रोजगार योजनाओं की उपलब्धता भी अहम भूमिका निभाती है। इन माध्यमों से किसानों को संकट के समय आर्थिक सहारा मिल सकता है। हालांकि, राहत और सहायता का लाभ उठाने के लिए इन सुविधाओं तक पहुंच होना जरूरी है।
अध्ययन के अनुसार, किसानों की जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत बनाने में आर्थिक संसाधनों के साथ-साथ सरकारी सहायता और उपलब्ध जानकारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी बंट रही जमीन, घट रहा खेतों का आकार
भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी जमीन का बंटवारा होने के कारण कृषि जोतों का आकार घटता गया है। बड़ी संख्या में किसानों के पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है। ऐसे में सीमित भूमि पर खेती से परिवार की सभी जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है।