I4C ने चैटजपीटी और Gemini जैसे AI चैटबॉट्स पर निजी जानकारी, फोटो, पासवर्ड और बैंक विवरण साझा करने से बचने की सलाह दी है। साइबर अपराध होने पर 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने अपने साइबरदोस्त हैंडल के माध्यम से स्पष्ट किया है कि ChatGPT और Gemini जैसे चैटबॉट्स को दोस्त समझकर व्यक्तिगत जानकारी, फोटो या संवेदनशील विवरण साझा करना प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। डिजिटल दुनिया में बढ़ती सहूलियत के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
विज्ञापन
व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बढ़ता जोखिम
वर्तमान समय में बहुत से लोग AI चैटबॉट्स से बातचीत करते समय उन्हें अपना बेहद करीबी मित्र मानने लगते हैं। इस दौरान उपयोगकर्ता अपनी व्यक्तिगत समस्याएं, पारिवारिक बातें, अपनी लोकेशन, निजी फोटो और यहां तक कि गोपनीय पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां भी चैट में टाइप कर देते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह टूल्स सामान्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तरह कार्य नहीं करते हैं। इन टूल्स पर साझा किया गया डेटा संबंधित प्रणालियों में हमेशा के लिए स्टोर हो सकता है। इसके अलावा इस डेटा का उपयोग AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए हो सकता है या फिर किसी संभावित डेटा लीक के दौरान यह जानकारी सार्वजनिक हो सकती है। यहीं से प्राइवेसी का बड़ा जोखिम उत्पन्न होता है।
अनजाने प्लेटफॉर्म पर डेटा का खतरा
AI टूल्स से होने वाली बातचीत बेहद सामान्य और सहज लगती है, जिससे लोग इसे एक प्राइवेट चैट समझने की भूल कर बैठते हैं। वास्तव में यह किसी अनजान और अज्ञात प्लेटफॉर्म पर अपनी निजी जानकारी डालने के समान है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अपनी व्यक्तिगत तस्वीरें अपलोड करना या फिर बैंक खातों का विवरण, ओटीपी और पासवर्ड साझा करना अत्यधिक जोखिम भरा कदम है। एक बार यदि कोई डेटा इस डिजिटल सिस्टम में चला जाता है, तो उस पर पुनः नियंत्रण पाना बहुत कठिन हो जाता है। इसलिए लोगों को AI को अपना मित्र समझने से बचना चाहिए। I4C ने परामर्श दिया है कि AI से बात करते समय कभी भी अपनी असली पहचान न उजागर करें।
साइबर अपराध होने पर तुरंत करें शिकायत
सुरक्षा एजेंसी की सलाह है कि आवश्यकता पड़ने पर काल्पनिक नाम का प्रयोग किया जा सकता है। किसी भी स्थिति में व्यक्तिगत फोटो, आवश्यक दस्तावेज या संवेदनशील जानकारी इंटरनेट पर अपलोड न करें। हमेशा AI चैट को किसी सार्वजनिक स्थान की तरह ही समझें। यदि चैट के दौरान कोई लिंक साझा करना हो, तो पहले यह अच्छी तरह जांच लें कि उस लिंक को कौन-कौन देख सकता है। यदि किसी व्यक्ति के साथ कोई साइबर अपराध घटित होता है, तो वह तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह महत्वपूर्ण चेतावनी सरकार के 'साइबर सेफ इंडिया' अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है।