राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ने के आसार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूदा प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर कड़ा प्रहार किया। गहलोत ने जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कामयाब होने के सुझाव दिए, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी राजस्थान दौरे को लेकर दो बड़ी मांगें भी रखीं।
गहलोत ने कहा कि भजनलाल शर्मा पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं और वे चाहते हैं कि वे सफल हों। उन्होंने कटाक्ष भरे लहजे में कहा- मैं चाहता हूं कि उनके सलाहकार मेरे बयान लैपटॉप पर चलाकर सुनाएं, ताकि उन्हें समझ आ सके और वे आगे सफल हो पाएं।
ये भी पढ़ें: Jodhpur News: अरुण चतुर्वेदी का गहलोत पर निशाना, बोले- दूसरों की चिंता से पहले अपने घर में देखे कांग्रेस
पूर्व मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन कांड का जिक्र करते हुए कहा कि विधायक समर्थित बजरी माफियाओं ने एक युवक की बेरहमी से पिटाई की क्योंकि उसने विधायक से किए गए वादे की याद दिलाई थी।
गहलोत के अनुसार इस मामले में न तो पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई की और न ही पीड़ित का उचित इलाज हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है और सरकार अगर पुलिस प्रशासन का इकबाल कायम कर दे तो अपराधियों में भय अपने आप पैदा हो जाएगा।
गहलोत ने उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के तीन साल बाद भी न्याय नहीं मिला है। हमारी सरकार होती तो 6-8 महीने में दोषियों को सजा हो जाती। हमने घटना के 3 घंटे के भीतर ही आरोपियों को पकड़ लिया था लेकिन केंद्र की एजेंसी एनआईए के पास मामला जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री दोनों चुप क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बीजेपी नेताओं ने 50 लाख मुआवजे का वादा किया था लेकिन सत्ता में आने के बाद उसे भुला दिया गया।
ये भी पढ़ें: Rajasthan News: VVIP सप्ताह; राजस्थान में 25 को मोदी, 27 को सीतारमण, प्रशासन अलर्ट मोड पर
इसी क्रम में गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दो बड़ी मांगें रखीं। पहली मांग- आदिवासियों की आस्था से जुड़े मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे तब भी मोदी मानगढ़ आए थे लेकिन घोषणा अधूरी रह गई। दूसरी मांग- कन्हैयालाल के परिजनों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र को स्पष्ट रोडमैप देना चाहिए।
निवेश और किसानों के मुद्दे पर भी गहलोत ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान में 36 करोड़ निवेश का दावा खोखला है, वास्तव में कोई ठोस निवेश प्रदेश में नहीं आया। उन्होंने सरसों किसानों को मुआवजा न मिलने, नरेगा मजदूरों की संख्या घटाने और स्वास्थ्य योजनाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
गहलोत ने नरेश मीणा के 12 दिन से चल रहे अनशन का भी जिक्र किया और कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन आम बात है लेकिन सरकार का रवैया असंवेदनशील है। उन्होंने याद दिलाया कि जब गुरुशरण छाबड़ा ने आंदोलन किया था तब उनकी सरकार ने तुरंत पहल कर अनशन खत्म कराया लेकिन बीजेपी राज में छाबड़ा की जान चली गई।
अंत में गहलोत ने 2020 की कांग्रेस सरकार गिराने के मामले पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि एसीबी ने भले ही एफआर दे दी हो, लेकिन केस खत्म नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने भी मामला खारिज नहीं किया। गहलोत ने आरोप लगाया कि यह पूरा प्रैक्टिकल कांड था।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए