राजस्थान में कफ सिरप पीने के बाद बच्चों की मौत के मामलों पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की भजनलाल शर्मा सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। गहलोत ने कहा कि अगर सिरप बनाने वाली कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड थी, तो उसे सरकारी ठेका कैसे दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी के सैंपल फेल हुए हैं, तो सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, ‘बैन लगाना चाहिए और दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए’। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार इस हद तक बढ़ गया है कि अब आम नागरिक की जान की कीमत तक परवाह में नहीं रही।
‘राजस्थान की स्वास्थ्य योजनाएं पूरे देश के लिए मिसाल थीं’
गहलोत ने कहा कि राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी थी। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार के समय निशुल्क दवा योजना और चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी नीतियां लागू की गईं, जिन्होंने देशभर में मॉडल स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में पच्चीस लाख रुपये तक का बीमा, एमआरआई, सीटी स्कैन, ऑपरेशन और ब्लड टेस्ट तक फ्री थे। यह किसी राज्य या देश में नहीं था। केंद्र सरकार को इन योजनाओं का विश्लेषण करना चाहिए और पूरे देश में लागू करना चाहिए।
‘आज राजस्थान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच रही है’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की जो छवि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनी थी, वह अब दागदार हो रही है। उन्होंने कहा कि अलवर, भरतपुर, सीकर जैसे जिलों में कफ सिरप से बच्चों की तबीयत बिगड़ने और मौतों की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। गहलोत ने कहा कि सरकार जांच रिपोर्ट का हवाला देकर पल्ला झाड़ रही है, लेकिन जनता जवाब चाहती है। बच्चों की मौत जैसे मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाने की बजाय सरकार मौन है, जो बेहद दुखद है।
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‘यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता है’
गहलोत ने कहा कि यदि सिरप में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई थी, तो तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पहले भी आई ड्रॉप से जुड़ी एक घटना के बाद सरकार ने बैन लगाया था और सख्त प्रोटोकॉल लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि अब जब बच्चों की जान जा रही है, तो कार्रवाई में देर क्यों? सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।
‘शिक्षा और स्वास्थ्य सभी के लिए फ्री होना चाहिए’
अशोक गहलोत ने कहा कि यदि भारत को विश्वगुरु बनना है तो शुरुआत शिक्षा और स्वास्थ्य की पूर्ण निशुल्कता से करनी होगी। उन्होंने कहा कि जो लोग सक्षम हैं, वे निजी सुविधाएं ले सकते हैं, लेकिन जो गरीब हैं, उनके लिए सरकार को सोशल सिक्योरिटी कवरेज सुनिश्चित करना चाहिए।
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