Rajasthan: राजस्थान में जल्द ही नया सहकारिता अधिनियम बनाया जाएगा। यूडीएच झाबर सिंह खर्रा ने इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गृह निर्माण सहकारी समितियों पर अंकुश के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे। ताकि निजी कॉलोनाइजरों द्वारा की जाने वाली अनियमिताओं पर लगाम कसी जा सके।
राजस्थान विधानसभा में शहरी विकास एवं आवास (यूडीएच) विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नया सहकारिता अधिनियम लाया जाएगा, जिसका उद्देश्य गृह निर्माण समितियों द्वारा बसाई गई कॉलोनियों में आवश्यक सुविधाओं का विकास सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, सरकार को ऐसी शक्तियां दी जाएंगी जिससे इन समितियों में हो रही अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
जयपुर में नई योजनाएं
मंत्री ने बताया कि जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा अटल विहार (284 भूखंड), गोविंद विहार (202 भूखंड) और पटेल नगर (220 भूखंड) आवासीय योजनाएं शुरू की गई हैं। साथ ही, शहर में यातायात सुधार और आधारभूत संरचना विकास के लिए करीब 850 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं…ओटीएस चौराहे पर फ्लाईओवर, रिद्धि-सिद्धि चौराहे पर एलिवेटेड रोड, अपेक्स सर्किल से जगतपुरा बालाजी तिराहा तक एलिवेटेड रोड और झोटवाड़ा आरओबी से खातीपुरा आरओबी तक एलिवेटेड रोड निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
जयपुर की यातायात व्यवस्था सुधार के लिए 250 करोड़ रुपये, जबकि सेक्टर रोड निर्माण पर 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। स्वर्ण जयंती पार्क और द्रव्यवती नदी अपग्रेडेशन के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पिछली सरकार में जारी पट्टों की होगी जांच
मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में 13 लाख से अधिक पट्टे जारी किए गए, जिनमें अनियमितताएं सामने आई हैं। इस संबंध में अब तक 21 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, विभिन्न शहरों में एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) परियोजनाओं में 1,174 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के आदेश 18 फरवरी 2025 को जारी किए जा चुके हैं।
चंबल रिवर फ्रंट बना घाटे का सौदा
मंत्री ने कोटा के चंबल रिवर फ्रंट परियोजना को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रखरखाव पर हर माह 2 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि आय मात्र 1 करोड़ रुपये के आसपास है। अधिकांश दुकानों का आवंटन नहीं होने से कोटा विकास प्राधिकरण को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। साथ ही, पर्याप्त पौधारोपण न होने के कारण पर्यटकों को गर्मी में परेशानी हो रही है।