राजस्थान के कृषि और आपदा राहत मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय मसाला क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में कहा कि 22 साल बाद भी उन्हें आपदा राहत विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जहां आफत पड़े वहां मेरे को जाना पड़ता है। बाढ़ का मंत्री हूं तो बाढ़ में जाना पड़ेगा, मकान गिरे तो जाना होगा, बिजली गिरे तो भी जाना होगा। यह जिम्मेदारी मेरे हिस्से में आई है।
डॉ. किरोड़ी ने याद किया कि वर्ष 2003 से 2008 तक वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री कार्यकाल में भी वे आपदा प्रबंधन मंत्री रहे थे। अब 22 साल बाद भजनलाल शर्मा की सरकार में फिर उन्हें वही विभाग मिला है। उन्होंने कहा कि शायद मुख्यमंत्री ने उनका पुराना चार्ज देखकर यह जिम्मेदारी सौंपी है।
अपने संबोधन में डॉ. किरोड़ी ने एक पुराना वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय वे सवाई माधोपुर जाते हुए लालसोट में रुके थे, जहां ग्रामीणों ने उन्हें बिजली गिरने से हुई मौत और एक विधवा की दुखद स्थिति के बारे में बताया। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को फोन करने पर उन्होंने तुरंत उस विधवा को 50 हजार रुपये की सहायता दिलवाई थी।
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वर्तमान हालात पर बोलते हुए मंत्री ने बताया कि भारी बारिश और बिजली गिरने से अब तक 193 लोगों की मौत हुई है। इनमें से कुछ लोग रील बनाने के चक्कर में नदी-नालों में बह गए। उन्होंने चेतावनी दी कि लोग बरसात के मौसम में इस तरह का जोखिम न उठाएं। उन्होंने कहा कि सभी मृतकों को आपदा राहत से आर्थिक मदद दी जाएगी।
डॉ. किरोड़ी ने भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के रहते राहत कार्यों में पैसे की कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संकट की घड़ी में हर पीड़ित तक मदद पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
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