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जोबनेर बस हादसा: छात्रा की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, 42 सीटर बस में मिले 92 बच्चे, जांच कमेटी गठित

Tue, 11 Aug 2026 09:14 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जोबनेर स्कूल बस हादसे ने स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। हादसे में एक छात्रा की मौत के बाद ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर निजी स्कूलों की बसों की जांच शुरू कर दी। एक 42 सीटर बस में 92 बच्चे मिलने के आरोप ने प्रशासन को भी सकते में डाल दिया।
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जोबनेर स्कूल बस हादसे के बाद जांच शुरू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जोबनेर में स्कूल बस और स्कॉर्पियो की टक्कर में 15 वर्षीय छात्रा लक्षिता कुमावत की मौत के बाद स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। ग्रामीणों ने निजी स्कूलों की चार बसें रुकवाकर उनकी जांच की और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने सहित सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए।

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प्रदर्शन के दौरान एक 42 सीटर बस में 92 बच्चे मिलने की बात सामने आई। ग्रामीणों ने कई वाहनों पर आवश्यक बाल वाहिनी पहचान नहीं होने की शिकायत भी की। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी लेकिन घटना ने स्कूल बसों की नियमित निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

हादसे के बाद बनी विशेष कमेटी
8 अगस्त को जोबनेर क्षेत्र में स्कूल बस और स्कॉर्पियो की भिड़ंत में करीब 19 छात्र घायल हुए थे। हादसे में गंभीर रूप से घायल लक्षिता कुमावत ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद बढ़ते आक्रोश और बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच जोबनेर एसडीएम के स्तर पर निजी स्कूलों की बाल वाहिनियों की जांच के लिए विशेष कमेटी गठित की गई है।
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कमेटी की कमान जोबनेर तहसीलदार को सौंपी गई है। इसमें विकास अधिकारी पंचायत समिति जोबनेर, जोबनेर थाना पुलिस, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी और सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को शामिल किया गया है। कमेटी स्कूल बसों का मौके पर भौतिक सत्यापन करेगी और फिटनेस प्रमाण-पत्र सहित बच्चों के सुरक्षित परिवहन से जुड़े मानकों की जांच करेगी। कमेटी को दो दिन में समेकित रिपोर्ट और स्पष्ट सिफारिश देने के निर्देश दिए गए हैं।

जोबनेर थाने के एएसआई मदनलाल ने ग्रामीणों को संबंधित स्कूल बसों के चालान और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद वास्तव में कितनी बसों के खिलाफ कार्रवाई होती है।
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जोबनेर की घटना ने प्रशासन, शिक्षा विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग और स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए जांच हादसे के बाद नहीं, बल्कि नियमित रूप से पहले होनी चाहिए।

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