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राजस्थान: नरेश मीणा को 15 साल पुराने राजस्थान यूनिवर्सिटी गोलीकांड में राहत, जयपुर कोर्ट ने किया बरी

Thu, 29 Oct 2026 07:29 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान विश्वविद्यालय के 2011 के चर्चित गोलीकांड मामले में छात्र नेता और राजनेता नरेश मीणा को जयपुर सेशन कोर्ट ने बरी कर दिया है। करीब 15 साल तक चले इस मामले में अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर पाया।
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नरेश मीणा अपने समर्थकों के साथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान की छात्र राजनीति से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने गोलीकांड मामले में नरेश मीणा को अदालत से राहत मिली है। जयपुर सेशन कोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय में 2011 में हुई फायरिंग से जुड़े मामले में उन्हें बरी कर दिया। पुलिस ने उस समय नरेश मीणा पर फायरिंग की साजिश रचने और युवकों को इसके लिए पैसे उपलब्ध कराने के आरोप लगाए थे। हालांकि, सुनवाई के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
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छात्रसंघ कार्यालय के उद्घाटन समारोह में हुई थी फायरिंग
मामला 3 दिसंबर 2011 का है। उस समय राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष प्रभा चौधरी के कार्यालय का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक मौजूद थे। इसी दौरान भीड़ के बीच एक युवक ने कथित तौर पर देशी कट्टे से फायरिंग कर दी। गोली चलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

पुलिस ने मौके से अभिषेक मीणा नाम के युवक को हथियार सहित पकड़ लिया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और छात्र नेता नरेश मीणा सहित अन्य लोगों के खिलाफ गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया।
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नरेश मीणा पर फायरिंग की साजिश रचने का था आरोप
पुलिस की जांच में आरोप लगाया गया था कि नरेश मीणा ने कार्यक्रम का विरोध करने और वहां दहशत फैलाने के उद्देश्य से फायरिंग की साजिश रची थी। आरोपों के मुताबिक, उनके संपर्क में रहने वाले अभिषेक और संदीप नाम के युवकों को हथियार खरीदने और फायरिंग करने के लिए पैसे उपलब्ध कराए गए थे। घटना के बाद नरेश मीणा के मौके से चले जाने को भी जांच के दौरान आधार बनाया गया था। हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप थे। अदालत में इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करना जरूरी था।

प्रभा चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद गरमाई थी छात्र राजनीति
घटना के समय नरेश मीणा राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के प्रभावशाली चेहरों में शामिल थे। वह पूर्व छात्रसंघ महासचिव रह चुके थे। वहीं, प्रभा चौधरी ने वर्ष 2011 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर छात्रसंघ चुनाव जीतकर विश्वविद्यालय की 44 साल की परंपरा में पहली महिला अध्यक्ष बनने का इतिहास बनाया था।

उस दौर में छात्र राजनीति के विभिन्न गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। कार्यालय के उद्घाटन का विरोध भी किया जा रहा था। इसी राजनीतिक माहौल के बीच हुई फायरिंग ने विश्वविद्यालय परिसर में तनाव पैदा कर दिया था।

ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने किया बरी
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने नरेश मीणा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीतिक रंजिश से प्रेरित बताया। एडवोकेट वाहिद नकवी की ओर से दलील दी गई कि नरेश मीणा द्वारा गोली चलवाने, साजिश रचने या फायरिंग के लिए धन उपलब्ध कराने का कोई ठोस और विश्वसनीय प्रमाण रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।

करीब 15 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किया। अदालत ने पाया कि नरेश मीणा के खिलाफ लगाए गए आरोप पर्याप्त और ठोस साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं हो सके। इसके बाद उन्हें मामले में बरी कर दिया गया।
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