राजस्थान में सरकार और राजघराने के बीच जारी विवाद बेशक राज्य से निकलकर भाजपा आलाकमान तक पहुंच गया हो लेकिन इस लड़ाई में पहला चरण तो राजघराने के ही नाम रहा। राज्य सरकार को जहां पहले भाजपा नेतृत्व से निराशा हाथ लगी वहीं उसके बाद कोर्ट ने भी उसे झटका दे दिया।
नतीजतन प्रशासन को अपना कदम वापस लेते हुए राजमहल पैलेस के सभी गेट खोलने पड़े और अपने द्वारा लगाई गई सील को भी हटाना पड़ा। खास बात ये रही कि इस लड़ाई में महारानी कहलाने वाली मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को निजी तौर पर भी झटका लगा।
असल में पूरा मामला ये था कि लंबे समय से जयपुर प्रशासन और जयपुर राजघराने के बीच 12 बीघा में बने राजमहल पैलेस को लेकर विवाद चल रहा है। कोर्ट में चले केस के बाद जो डिक्री जारी हुई उसे भी दोनों पक्ष अपने अपने अनुसार परिभाषित कर रहे थे।
इसी बीच बीते 24 अगस्त को प्रशासन ने अचानक सुबह सवेरे फोर्स के साथ राजमहल पैलेस के एक हिस्से को ढहाते हुए मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इसके विरोध में महारानी पदमिनी देवी समर्थकों के साथ सड़कों पर उतर आई।
जयपुर की सड़कों पर उतरा राजघराना, हिल गई सरकार
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जयपुर की सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ा तो प्रशासन के साथ ही सरकार के भी कान खड़े हो गए। खास बात ये रही कि इस जुलूस का नेतृत्व बुजुर्ग महारानी ने ही किया जिन्होंने इसे राजपरिवार की बेइज्जती और राजपूतों के मान सम्मान से जोड़ दिया।
मामला क्षत्रिय सम्मान का बना तो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी तुरंत संज्ञान लिया। भाजपा नेतृत्व की बेचैनी की वजह ये भी थी कि महारानी ने इस लड़ाई को राजस्थान से निकालकर उत्तर प्रदेश में भी लड़ने का मन बना लिया था।
ऐसे में यूपी में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भाजपा को क्षत्रिय वोट खोने का डर सताने लगा। इसके बाद तुरंत भाजपा आलाकमान की ओर से केंद्रीय संगठन मंत्री श्यौदान सिंह को डेमेज कंट्रोल के लिए भेजा गया।
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जिन्होंने वसुंधरा राजे और राजघराने की राजकुमारी दीया सिंह को आमने सामने बैठाकर बातचीत कराई। केंद्रीय नेतृत्व की ओर से सख्त संकेत मिलने के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मामले को ज्यादा तूल न देते हुए राजघराने के गेट खुलवाने के संकेत दे दिए थे।
इसके बाद रविवार सुबह होते ही राजभवन के सील किए गए गेट को खोल दिया गया। दूसरी ओर मंगलवार को कोर्ट से भी इस संबंध में राजस्थान सरकार और जयपुर विकास प्राधिकरण को झटका लगा।
जयपुर की एडीजे कोर्ट के न्यायाधीश कैलाश चंद्र मिश्रा ने तुंरत सील किए गए दरवाजों को खोलने और ध्वस्त किए गए निर्माण को एक महीने के अंदर दोबारा बनवाने के निर्देश दिए।