राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की तानाशाही का उदाहरण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र का जिस तरह मजाक वर्तमान सरकार ने बनाया है, वैसा पहले कभी देखने को नहीं मिला।
मीडिया से बातचीत में जूली ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों, नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और लद्दाख से जुड़े वादों को पूरा कराने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण अनशन पर बैठे थे। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ने लद्दाख को लेकर कई वादे किए थे लेकिन बाद में उनसे पीछे हट गई।
जूली ने कहा कि सरकार ने इतने दिनों तक अनशन को गंभीरता से नहीं लिया। जब पिछले कुछ दिनों में सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी और उन्हें देश-विदेश से व्यापक समर्थन मिलने लगा, तब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर अस्पताल पहुंचा दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में संवेदनशील होती तो आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर पहले बातचीत करती और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विचार करती।
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नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी नीट परीक्षा का निष्पक्ष संचालन करने में विफल रही है। उनका कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय संबंधित लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है।
जूली ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का दायित्व जनता की आवाज सुनना होता है लेकिन वर्तमान सरकार हर आंदोलन को दबाने की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली सरकार को देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है, जहां जनता समय आने पर बड़ी-बड़ी सरकारों को बदलने की ताकत रखती है, इसलिए किसी भी सरकार को जनभावनाओं की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।