सवर्ण न्याय यात्रा के दौरान हुए हादसे में देवराज पलाड़ा की मौत के बाद मचे विवाद के बीच रावणा राजपूत समाज के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत सिंह सोडाला ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया तथा पीड़ित परिवार की सहायता के लिए त्वरित कदम उठाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार ने जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।
सवर्ण समाज की ओर से महिपाल सिंह मकराना ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें मृतक देवराज पलाड़ा के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, एक आश्रित को सरकारी नौकरी तथा घटना के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शामिल थी। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव और प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में रंजीत सिंह सोडाला ने बताया कि सरकार की ओर से उनसे संपर्क किया गया, जिसके बाद समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकारात्मक समाधान निकाला गया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में शायद ही किसी आंदोलन के दौरान किसी पीड़ित परिवार को इतनी जल्दी सरकारी सहायता मिली हो, जितनी इस मामले में उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सुनिश्चित किया कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता मिले।
रंजीत सिंह सोडाला ने बताया कि आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार गंभीर है। सरकार ने आंदोलन से जुड़े वीडियो उपलब्ध कराने को कहा है और पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित करने का आश्वासन दिया है। जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या दोष सामने आता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोडाला ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री की मंशा होती तो सवर्ण न्याय यात्रा को जयपुर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया जाता लेकिन सरकार ने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री स्वयं यह जानना चाहते हैं कि आखिर किसके आदेश पर और किन परिस्थितियों में राजस्थान का माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।