कांग्रेस के सी.पी. जोशी भाजपा के राज्सवर्धन राठौड़ से अपने अनुभव के आधार पर मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। जोशी से अमर उजाला ने की खास बातचीत।
आपने भीलवाड़ा छोड़कर जयपुर ग्रामीण चुना, क्यों?
मैने अपने संसदीय क्षेत्र भीलवाड़ा से पांच साल के भीतर चम्बल का पानी लाने का वादा किया था, जिसे मैं पूरा नहीं कर सका। हालांकि दो हजार करोड़ की परियोजना को मंजूरी दिलवाई और पाइप भी बिछना शुरू हो गए हैं। इस कारण मैने वहां की जनता से माफी मांगते हुए अपना क्षेत्र बदला है।
फिर इस सीट पर आपके वादे पर कौन विश्वास करेगा?
नहीं, ऐसा नहीं है कि वादा किया और भुला दिया। भीलवाड़ा की पेयजल परियोजना कुछ वर्षों में पूरी हो जाएगी। सही बात तो यह है कि मैने दो साल पहले ही चुनाव नहीं लडऩे और संगठन के काम को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया था। लेकिन विधानसभा में कांग्रेस के खिलाफ आए परिणाम के चलते पार्टी ने मुझे चुनाव लडऩे के निर्देश दिए, जिसे मैने स्वीकार कर लिया। मैं चुनाव नहीं लड़ूं, तो लोग कहते कि मैं विधानसभा चुनावों में पार्टी का हाल देखकर डरे हैं।
राठौड़ का कहना है कि आपकी राजनीति से देश को नहीं बल्कि आपको ही इससे फायदा हुआ है?
इस बारे में मैं आपसे क्या कहूं? राठौड़ राजनीति में नए हैं और उनकी इस बात का क्या जवाब दे सकता हूं? मैं तो बस इतना कहूंगा कि यह कोई व्यक्तियों की लड़ाई थोड़े ही है। भई, यह तो पार्टियों की लड़ाई है।
नई सीट को लेकर क्या तैयारी है?
जयपुर मेरे लिए कोई नया तो है नहीं और ऐसा भी नहीं है कि यहां के लोग मुझे नहीं जानते हों। कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहा हूं और जनता के बीच लागातार जा रहा हूं। कार्यकर्ताओं और जनता की सुन भी रहा हूं। पूरे हौसले के साथ चुनाव लड़ेंगे। यहां की समस्याओं का आकलन करेंगे और इसके बाद जनता से समस्याओं के निपटारे का वादा करेंगे।
उम्मीदवारों को टिकट दिलवाने में आपकी चली है। क्या मानते हैं कि राज्य में कांग्रेस की कितनी सीटें आ सकती हैं?
अरे भाई, मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं। इस सवाल का क्या जवाब दूं। ये तो भविष्य ही बताएगा।
चर्चा चल रही है कि आपने इस सीट के सांसद लालचंद कटारिया का टिकट कटवाकर खुद ले लिया?
ऐसा बिलकुल नहीं है। कटारिया ने खुद टिकट की मांग नहीं की। यदि वे मांग करते, तो मुझे टिकट बिलकुल नहीं मिलता। यह बात आप खुद कटारिया जी से पूछ सकते हैं। वे खुद और अधिक बता सकते हैं।