संघर्षों से भरा रहा जीवन
1989 में बाड़मेर के रावतसर में रूमा देवी का जन्म हुआ था। जब वह चार साल की थीं तो उनकी मां का निधन हो गया। उसके बाद जीवन मानो रूमा से रूठ गया। जैसे-तैसे 8वीं तक पढ़ाई की। फिर घरवालों ने पढ़ाई बंद करवाकर शादी कर दी। गृहस्थी जीवन संभला भी नहीं था कि उनका बच्चा बीमार पड़ गया। ससुराल में पैसों की कमी के कारण उसका इलाज नहीं हो सका और उसकी मौत हो गई। यहीं से रूमा ने ठाना कि वो अब नियति के भरोसे नहीं बैठ सकती हैं। गरीबी ने उनसे पढ़ाई, बच्चा और खुशी सबकुछ छीन लिया था। उन्होंने निश्चिय कर लिया था कि अब वो अपने पैरों पर खड़ी होंगी।
महिलाओं को कशीदाकारी सिखाती रूमा
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कशीदाकारी के हुनर को बनाया हथियार
रूमा को बचपन से ही कशीदाकारी का काम आता था। इस हुनर को ही उन्होंने अपना हथियार बनाया और वो दीप-देवल नाम के एक एनजीओ से जुड़ गईं। कशीदाकारी के काम करने वाली रूमा देखते-देखते सबकी चहेती बन गई। साल 2010 में उन्हें एनजीओ का अध्यक्ष बना दिया गया। आज रूमा देवी की पहचान फैशन डिजाइनर की है। जिनके कशीदाकारी कपड़ों की विदेशों तक मांग है।
विदेश के कई फैशन शो में दिखा हुनर
इसके बाद रूमा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके सपनों को पंख लग चुके थे। रूमा अब अपने पैरों पर खड़ी थी। फिर उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी सशक्त करने की ठानी। उन्होंने महिलाओं को एनजीओ से जोड़ना शुरू किया। आज इस एनजीओ से 75 गांवों की 22 हजार महिलाएं जुड़ चुकी हैं। ये महिलाएं हस्तशिल्प के उत्पाद बनाकर अपना घर चलाती हैं। एनजीओ का हस्तशिल्प से बना उत्पाद विदेशों में जाता है। रूमा के बनाए कपड़ों को लंदन, जर्मनी, सिंगापुर और कोलंबो के फैशन शो में भी दिखाया जा चुका है।
केबीसी में रूमा देवी और सोनाक्षी सिन्हा
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केबीसी में जीते थे 12 लाख 50 हजार रुपये
रूमा देवी अपनी काबिलियत 'कौन बनेगा करोड़पति' में भी दिखा चुकी हैं। वो अमिताभ बच्चन के साथ हॉट सीट पर नजर आई थीं। उन्होंने अमिताभ बच्चन के सवालों को बखूबी जवाब देकर 12 लाख 50 हजार रुपये जीते थें। केबीसी में उनका साथ अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने दिया था। वहीं रूमा ने जीते हुए पैसे अपने एनजीओ की महिलाओं के उत्थान में लगाने की बात कही थी। अमिताभ बच्चन ने रूमा के प्रयासों की खूब सराहना की थी।
राष्ट्रपति से सम्मान लेती रूमा देवी
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