राजस्थान हाइकोर्ट ने पूछा है कि मीणा जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी से बाहर क्यों न किया जाए? कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से जवाब मांगा है।
न्यायधीश नरेंद्र कुमार जैन और जेके रांका की खंडपीठ ने समता आंदोलन समिति के कैप्टन गुरविंदर सिंह व अन्य की याचिकाओं पर सोमवार को यह आदेश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 13 मई तक के लिए टाल दी गई है।
समता आंदोलन समिति और अन्य ने याचिका दायर कर मीणा जाति को एसटी कैटेगरी से बाहर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को सिफारिश भेजने का निर्देश देने का आग्रह किया था।
साथ ही गुर्जर सहित अन्य जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) के तहत पांच प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती दी थी।
राज्य सरकार ने जवाब में आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिका में केंद्र को पक्षकार नहीं बनाया गया है, जबकि मीणा जाति को एसटी सूची से बाहर करवाने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया गया है।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अघिवक्ता एसपी शर्मा व अधिवक्ता शोभित तिवाड़ी ने याचिका में केंद्रीय जनजाति मंत्रालय व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को पक्षकार बनाने का आग्रह किया।
अदालत ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए केन्द्र के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्येन्द्र सिंह राघव को याचिका की कॉपी दिलाते हुए इस मसले पर केंद्रीय जनजाति मंत्रालय व आयोग को 3 सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है।