राजस्थान हाई कोर्ट और गोदाम का ताला तोड़ते आरोपी
- फोटो : Amar Ujala
राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलवार को गृह सचिव, जयपुर के पुलिस कमिश्नर, डीसीपी, माणक चौक थाना एसएचओ, जांच अधिकारी माणक चौक थाना, CBI एडवोकेट श्वेताभ सिंघल, शुभंकर सिंघल, राकेश सिंघल और गौतम अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस जारी कर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट जयपुर के जौहरी बाजार के गणगौर के रास्ते में संपत्ति का ताला तोड़कर कब्जा करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहा था।
मकान मालिक-किराएदार विवाद, माणक चौक थाने में मामला दर्ज
किराएदार राजेंद्र जौहरी के वकील पूनम चंद भंडारी ने याचिका में कहा है कि नौ नवंबर 2022 को किराएदार ने गोदाम खोलने की कोशिश की। इस पर शुभांकर सिंघल और उसके भाई आ गए और गाली गलौज कर मारपीट की। इस दौरान पत्थर मारकर ताला तोड़ने की कोशिश की गई। इसकी रिपोर्ट माणक चौक थाने में दर्ज करवा दी। अगले दिन शाम को करीब 7:30 बजे गोदाम से सामान निकालने गया तो फिर दोनों वकील आ गए और बदतमीजी करने लगे। इसके उसने चेतक पुलिस को फोन किया। पुलिस मौके पर आ गई और सबको माणक चौक थाने भेज दिया गया। मकान मालिक के लड़कों ने ताले खराब कर दिए ताकि खुल नहीं सकें। इस घटना की भी किराएदार ने माणक चौक थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
याचिका के मुताबिक, इसी दिन 10 नवंबर 2022 को एक घटना और हुई कि गोदाम में कुत्तों के पिल्ले अंदर चले गए और बाहर नहीं आ पा रहे थे। किसी ने मेनका गांधी को फोन कर दिया और मेनका गांधी ने अपने एनजीओ की सदस्या को मौके पर कुत्तों को बचाने के लिए भेजा। उस एनजीओ सदस्या महिला ने माणक चौक थाना पुलिस को सूचित किया तो वह मौके पर आ गई। वहां किराएदार और दोनों वकील भी मौके पर आ गए, क्योंकि गोदाम का ताला खुल नहीं पा रहा था। इसलिए वेल्डर को बुलाया गया। पुलिस ने अपनी मौजूदगी में लोहे के दरवाजे को वेल्डिंग से कटवा कर कुत्तों को बाहर निकाला और वापस दरवाजे को वेल्डिंग से बंद करा दिया और पुलिस ने पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई।
मकान मालिक के लड़कों ने ताले तोड़कर सामान ले गए
वकील पूनम भंडारी ने बताया कि इसके बाद किराएदार ने 14 नवंबर को कोर्ट में मकान मालिक और उसके वकील लड़कों को पाबंद कराने के लिए दावा कर दिया। उससे नाराज होकर 18 नवंबर 2022 को किराएदार को सुबह 7:30 सूचना मिली कि गोदाम में कुछ लोग ताले तोड़कर सामान ले जा रहे हैं। इस पर किराएदार ने तुरंत 100 नंबर पर सुबह 7.34 पर फोन किया और घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पर मकान मालिक के लड़के वकील शुभंकर सिंघल, श्वेताभ सिंघल और 15-20 आदमी और थे। उनमें से कुछ वकील थे। उन्होंने किराएदार से मारपीट की और उसका बहुमूल्य सामान, मशीनरी वगैरह गोदाम से बाहर निकाल दिया और गाड़ी में डालकर ले गए। इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। इसमें कई वकील सामान उठाकर गाड़ी में डालते हुए नजर आए और किराएदार से मारपीट करते हुए भी नजर आए। पुलिस मौके पर थी लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। तब किराएदार ने उन सभी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। लेकिन वकीलों से पुलिस की मिलीभगत होने के कारण शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। तब हाई कोर्ट में रिट याचिका पेश की गई।
हाई कोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र कुमार ने वकील पूनमचंद भंडारी के तर्कों से सहमत होते हुए सभी पक्षकारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने उन्हें तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा कोर्ट ने केस को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया।