सबसे पहले जानिए 25 सितंबर को क्या हुआ था?
कांग्रेस आलाकमान ने अजय माकन को पर्यवेक्षक बनाकर विधायक दल की बैठक में भेजा था। विधायकों ने बैठक से दूरी बनाई और आलाकमान के निर्देशों की अवहेलना की। तीन वरिष्ठ विधायकों के घर पर उन्होंने बैठक कर गहलोत पर भरोसा जताया था। उनका आरोप था कि अजय माकन सचिन पायलट के पक्ष में एक लाइन के प्रस्ताव पर मुहर लगवाना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया। बैठक के बाद माकन ने शांति धारीवाल, धर्मेंद्र राठौड़ और महेश जोशी सहित तीन नेताओं के खिलाफ अनुशासनहीनता की रिपोर्ट हाईकमान को दी थी। जिसके बाद तीनों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया था। तीनों नेता अपने जवाब भी दे चुके हैं। इसके बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
क्यों नहीं की गई कार्रवाई?
इन नेताओं पर कार्रवाई नहीं करने का सबसे बड़ा डर सरकार पर आने वाले संकट को लेकर माना जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्यों विरोध के समय में गहलोत गुट के करीब 92 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। उन पर आज तक कोई फैसला नहीं हुआ। हांलाकि, बाद में कई विधायक आलाकमान के साथ होने की बात कह चुके हैं। इसके बाद भी गहलोत गुट के विधायकों की संख्या अधिक बताई जा रही है। ऐसे में हो सकता है कि कांग्रेस आलाकमान सरकार को खतरे से बचाने के लिए तीनों विधायकों और पायलट को सीएम बनाने को लेकर कोई फैसला नहीं कर पा रहा है।
इन जिलों में गुर्जरों का दबदबा
राजस्थान में गुर्जर वोटर करीब छह फीसदी है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट गुर्जर समाज से ही आते हैं। ऐसे में उनका इस समाज पर काफी प्रभाव भी है। करौली, सवाई माधोपुर, जयपुर, टोंक, भरतपुर, दौसा, कोटा, धौलपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, झुंझनू और अजमेर की करीब 35 से 40 सीटों पर गुर्जर वोटरों का प्रभाव है। ऐसे में कांग्रेस अगर गुर्जर समाज की मांग को दरकिनार करती है तो इसका भुगतान उसे आने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव में करना पड़ सकता है।
गुर्जर नेता ने दी चेतावनी
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने कहा कि गुर्जर समाज ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिए थे, हमने एमएलए नहीं, मुख्यमंत्री चाहिए। 3 दिसंबर को राहुल गांधी पायलट को मुख्यमंत्री बनाकर उनके साथ राजस्थान आएं। ऐसा हुआ तो पूरा समाज उनका स्वागत करेगा, नहीं तो वे हमारे सवालों का जवाब देने के लिए तैयार रहें। अगर, हमें जवाब नहीं मिले तो विरोध निश्चित है। बैंसला ने कहा कि अब समय आ चुका है। बनाना है तो बनाएं नहीं तो सीधे तौर पर माना कर दें। हम चार साल से इंतजार कर रहे हैं और कब तक करेंगे।