राजस्थान की एक पंचायत ने एक अनोखा फैसला लेते हुए खाप पंचायतों को सबक दिया है कि तानाशाही फैसले छोड़ अब सामाजिक फैसले लेने का वक्त आ गया है। जालौर जिले की आनवलोज ग्राम पंचायत ने फैसला किया है कि कोई भी अपनी बेटी की शादी उस लड़के से नहीं करेगा, जिसके घर शौचालय नहीं होगा। इस ग्राम पंचायत की महिला सरपंच ममता विश्नोई ने यहां यह नियम लागू किया है।
राजस्थान सरकार ने ग्राम पंचायत चुनाव व स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के लिए शौचालय होने की शर्त लागू कर दी है, वहीं अब आनवलोज ग्राम पंचायत ने शौचालय नहीं होने पर बेटी की शादी नहीं करने के फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं की गरिमा बढ़ाने और स्वच्छता का पैगाम दिया है। प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित जालौर जिला राजस्थान के पिछड़े जिलों में आता है। इस ग्राम पंचायत में चार गांव आते हैं।
ग्राम पंचायत ने नियम तोडऩेवाले परिवार पर ही नहीं, बल्कि हलवाई व पंडित पर भी जुर्माने का प्रावधान रखा है। नियमानुसार जो भी परिवार अपने पुत्र की शादी करेगा, पहले उसे शपथ पत्र पर देना होगा कि उसके घर में शौचालय चालू हालत में है। तब ग्राम पंचायत संबंधित परिवार को लड़के की शादी के लिए एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देगी। इस एनओसी का उल्लेख निमंत्रण पत्र में भी करना होगा।