राजस्थान के टोंक जिले मालपुरा स्थित जानकीपुरा गांव की दबडिय़ा नाडी में खुदाई में निकली गुप्तकालीन सोने की मोहरें गुजरात तक पहुंच गई हैं। डिग्गी पुलिस ने अहमदाबाद के एक व्यक्ति के पास से चार मोहरें बरामद की और अहमदाबाद से ही एक और व्यक्ति ने खुद नौ मोहरें पुलिस को सौंपी। मालखने में इन मोहरों की संख्या 100 छूने को है। मोहरों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। पुलिस द्वारा ग्रामीणों से इन सिक्कों को जमा कराने की अपील की जा रही है। इससे प्रेरित होकर लोग सिक्के जमा कराने आ रहे हैं।
पुलिस को उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में काफी संख्या में मोहरें और जमा हो सकती हैं। पुलिस ने कहा है कि जो स्वयं मोहरें सौपेंगे उन पर किसी तरह का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन चेतावनी के बावजूद अब भी जो लोग पुलिस को मोहरें नहीं सौंप रहे हैं, उनसे मोहरें बरामद हुई, तो राजकीय भूमि से निधि को चुराने का मामला दर्ज किया जाएगा।
यहां मालखाने में जमा मोहरों की संख्या 96 पहुंच गई है। अहमदाबाद निवासी शत्रुघ्न सरावगी ने थाने पहुंचकर गुप्तकालीन सोने के नौ सिक्के जमा कराए। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने अहमदाबाद के एक जने से चार मोहरें बरामद की थीं। गौरतलब है कि नाड़ी में सौने के सिक्के मिलने की बात अगस्त 2016 से फैलना शुरू हुई थी, जिसे पुलिस व प्राशासन ने महज अफवाह माना था। ये बात सोशल मीडिया पर भी छाई रही थी, लेकिन 6 दिसम्बर को पहला सिक्का बरामद होने के बाद इस घटना की पुष्टि हो गई।
इस मामले में 17 दसम्बर को उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) ने डिग्गी थाने में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी की सहायता से नाडी क्षेत्र की मिट्टी हटाकर तारबंदी की और धारा 144 लगा लगाई। पुलिस जांच में पता चला कई ग्रामीण करीब 8-8 ग्राम के इन सोने के सिक्कों को दो-दो लाख रुपए में बेच भी चुके हैं। इन मोहरों पर एक राजा को घोड़े पर सवार दिखाया गया है।