राज्य सरकार की सिफारिश पर गुरुवार को राज्यपाल कलराज मिश्र के ऑफ़िस से रिटायर्ड डीजीपी एमएल लाठर की नियुक्ति के आदेश जारी हुए। एमएल लाठर सीएम अशोक गहलोत के विश्वसनीय और खास अधिकारियों में शामिल रह चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्हें राज्य सूचना आयुक्त पद पर नियुक्ति देकर सरकार ने चुनावी साल में बड़ा तोहफा दिया है, जबकि जस्टिस राम सिंह झाला को राज्य मानव अधिकार आयोग में सदस्य के पद पर नियुक्ति दी गई है।
लगातार दूसरे डीजीपी जिन्हें एडजस्ट कर बड़ा पद सौंपा
एमएल लाठर लगातार दूसरे पूर्व डीजीपी हैं, जिन्हें सरकार ने नियुक्ति देकर एडजस्ट किया है। उनसे पहले डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव के वॉल्युनटीयरी रिटायरमेंट लेने के बाद उन्हें आरपीएससी चेयरमैन बनाया था। सीएम गहलोत राजस्थान कैडर के रिटायर होने वाले आईएएस-आईपीएस अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी दे रहे हैं।
कौन हैं एमएल लाठर ?
राज्य सूचना आयुक्त बनाए गए रिटायर्ड डीजीपी एमएल लाठर का पूरा नाम मोहनलाल लाठर है। लाठर राजस्थान कैडर के 1987 बैच के आईपीएस अफसर हैं और मूलरूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। 10 मई 1961 को जन्मे एमएल लाठर ने एमएससी पास हैं। जाट समाज से हैं और राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील के रिश्तेदार हैं। साल 2022 में रिटायर लाठर को पुलिस पदक, राष्ट्रपति पुलिस पदक, बार टू पुलिस मैडल फॉर स्पेशल ड्यूटी, ऑपरेशन पराक्रम मैडल सहित कुल छह पदक मिले थे। वह दौसा, धौलपुर, कोटा ग्रामीण, सिरोही, उदयपुर के पुलिस एसपी पद पर भी रह चुके हैं। डीआईजी बीएसएफ बाड़मेर और बीकानेर, आरएसी, सीआईडी इंटेलीजेंस और राजस्थान पुलिस अकादमी में काम पोस्टिंग रह चुकी है। पुलिस प्लानिंग एंड वेलफेयर, जयपुर रेंज सेकेंड और आरएसी में आईजी पोस्ट पर भी सर्विस की है।
सबको साथ लेकर चल रही सरकार
गहलोत सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में कई आईएएस और आईपीएस अफसरों को रिटायरमेंट के बाद महत्वपूर्ण पदों पर पोस्टिंग दे चुकी है। इनमें भूपेंद्र यादव, डीबी गुप्ता, अरविंद मायाराम, डॉ. गोविंद शर्मा, संजय श्रोत्रिय, हरिप्रसाद शर्मा, आलोक त्रिपाठी, रामलुभाया, खेमराज चौधरी, चेतन देवड़ा, एनसी गोयल और जगरूप सिंह यादव शामिल हैं। इनमें मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी रैंक तक के अफसर शामिल हैं। इससे मैसेज यह जा रहा है कि सरकार सभी जातियों के पूर्व अफसरों साथ लेकर चलना चाहती है। डायरेक्ट सीएम को रिपोर्ट कर चुके अफसरों और ब्यूरोक्रेसी पर सरकार की लंबे समय तक मजबूत पकड़ वाले अफसरों को सरकार अपने साथ रखना चाहती है।