राजस्थान विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी इस समय सुर्खियों में हैं। एक समय ऐसा था जब उनको लगने लगा था कि उनका राजनीतिक करियर अब खत्म होने वाला है। 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उनको लगने लगा था कि अगर वह चुनाव जीतने में विफल रहते हैं को उनका करियर खत्म हो जाएगा।
सीपी जोशी का नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में भी शामिल था। लेकिन पार्टी ने अशोक गहलोत पर भरोसा जताया था। सीपी जोशी अब राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सुर्खियों में हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का नोटिस जारी करने के उनके फैसले को राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
नोटिस जारी करने पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नोटिस जारी करना मेरी शक्तियों के अंतर्गत आता है। जोशी ने बुधवार सुबह संवाददाताओं को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसले ऐसे हैं जो विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों की अयोग्यता का फैसला करने की पूर्ण शक्तियां प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा, स्पीकर की 10वीं अनुसूची शक्तियों में कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। राजस्थान संकट से पहले, धातु विज्ञान, भौतिकी और मनोविज्ञान का अध्ययन करने वाले जोशी ने इतना महत्वपूर्ण संवैधानिक पद कभी नहीं संभाला था। वह राजस्थान सरकार में मंत्री रह चुके थे और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन-2 सरकार में कैबिनेट मंत्री थे।
जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (एमएलएसयू) के छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में की थी। इससे पहले कि वे उदयपुर विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किए गए थे।
उनके दोस्तों का कहना है कि जोशी कॉलेज में मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे ग्वेरा के प्रशंसक थे और यहां तक कि गुरिल्ला नेता की तरह दाढ़ी रखते थे। उनके ही एक अन्य दोस्त ने कहा कि वह एक अच्छे वक्ता थे और उस समय के कई नेता उनसे काफी प्रभावित हुए थे।