राजस्थान उच्च न्यायालय ने शिक्षा सहायक भर्ती में अनुभव के आधार पर बोनस अंकों के प्रावधान को अवैध ठहराया है।
उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने भर्ती के परिणाम जारी करने पर अंतरिम रोक हटाते हुए दसवीं परीक्षा में अर्जित किए गए अंकों के आधार पर वरीयता सूची जारी करने के आदेश दिए हैं।
बोनस अंकों के विवाद को लेकर दायर सैकडों याचिकाएं एक साथ मंजूर करते हुये न्यायमूर्ति गोपालकृष्ण व्यास ने आज यह आदेश दिया।
राज्य सरकार के प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से 33 हजार 689 शिक्षा सहायक पदों पर सीधी भर्ती के लिए 30 मई को विज्ञप्ति जारी की गई थी।
इसके मुताबिक आवेदक का चयन सेकण्डरी परीक्षा में प्राप्तांक प्रतिशत तथा पूर्व में कार्यरत कार्मिकों को प्राप्त होने वाले बोनस अंकों के योग के आधार पर किया जाना था।
शिक्षा विभाग ने कार्यरत पैराटीचर, शिक्षाकर्मी, मदरसा पैराटीचर, विद्यार्थी मित्र एवं लोक जुम्बिश कार्मिकों को अनुभव अंक प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया, जिसको सर्व शिक्षा अभियान आंगनबाडी प्रेरक सहित अन्य राजकीय परियोजनाओं में कार्यरत कार्मिकों और निजी शिक्षण संस्थाओं में पढाने वाले अभ्यर्थियों ने चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राजस्थान शिक्षा सहायक सेवा नियम 2013 विभेदकारी है। राज्य सरकार चुनिंदा परियोजनाओं में नियुक्त कर्मचारियों को ही बोनस अंक का लाभ दे रही है जबकि अन्य परियोजनाओं को इससे वंचित किया जा रहा है।
सरकार इस तरह अभ्यर्थियों में भेदभाव नहीं कर सकती। इन याचिकाओं की सुनवाई के बाद न्यायालय ने 22 जुलाई को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था।