प्रशासनिक पद पर होने के बावजूद समाज को साहित्य और संस्कार से जोड़े रखने के लिए सवाई माधोपुर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) डॉ. सूरज सिंह नेगी ने पाती लेखन अभियान चला रखा है। जिससे दस हज़ार से ज़्यादा पत्र देश विदेश से मिल चुके हैं। उनका पाती लेखन खासी चर्चाओं में है। पेश है एक खास रिपोर्ट...
सवाई माधोपुर में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के पद पर कार्यरत डॉक्टर सूरज सिंह नेगी मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। प्रशासनिक अधिकारी की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही नेगी साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे है। डॉक्टर सूरज सिंह नेगी पिछले पिछले कई सालों से साहित्य लेखन का काम कर रहे हैं। अब तक पांच उपन्यास सहित कहानियां, संस्करण, निबंध, आलेख, समीक्षा, लघु उपन्यास, कई आर्थिक और सामाजिक विषयों पर आलेख लिख चुके हैं।
इन दिनों नेगी 'पाती लेखन' विधा को लेकर एक विशेष अभियान चला रहे हैं, जो देश ही नहीं विदेशों में भी खासा लोकप्रिय हो रहा है। पाती लेखन विधा अभियान के तहत उन्हें अब तक करीब 10 हज़ार लोगों के पत्र प्राप्त हो चुके हैं। पाती लेखन विधा अभियान गुम होती पत्र लेखन विधा को पुनर्जीवित करने का अभियान है। आधुनिकता के इस युग में जहां लोग ई-मेल, इंस्टाग्राम, फेसबुक, वाट्सएप जैसे सोशल मीडिया का उपयोग कर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, डॉक्टर सूरज सिंह नेगी पाती लेखन से लोगों को आत्मीयता और संवेदनाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पाती लेखन विधा को पुनर्जीवित करने के लिए उनके द्वारा स्कूलों और यूनिवर्सिटी स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है और उनके इस अभियान से हजारों लोग जुड़ रहे हैं।
पांच उपन्यास लिखे, पत्रों से बनाई दस पुस्तकें
साहित्यकार एडीएम डॉक्टर सूरज सिंह नेगी ने अब तक पांच उपन्यास लिखे हैं, जिनमें रिश्तों की आंच, ये कैसा रिश्ता, वसीयत, नियति चक्र, सांध्य पथिक प्रकाशित हो चुके हैं। उपन्यास के साथ ही उनका कहानी संग्रह "पापा फिर कब आओगे" पब्लिश हो चुकी है। उनका उपन्यास "रिश्तों की आंच" उर्दू "ये कैसा रिश्ता" का मराठी और गुजराती और "नियति चक्र" का राजस्थानी भाषा में " बगत रो फेर" के नाम से अनुवाद हो चुका है। वहीं, पाती लेखन विधा अभियान के तहत मिलने वाले पत्रों के संकलन से उनके द्वारा अब तक करीब 10 पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। जिनमें "माँ की पाती बेटी के नाम" बच्चों के पत्र, "एक पाती मीत को", "प्रकृति की पुकार", शिक्षक को पत्र", बापू की चिट्ठी, माटी की पुकार, पाती स्मृतियों के झरोखे से, पाती डाकिये को प्रमुख हैं। साथ ही कहानी विधा पर आधारित सांझ के दीप पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं। इन पुस्तकों और उपन्यासों के अलावा उनके साहित्य कुंदन, दुनिया घुटनों पर लॉकडाउन, बाल साहित्य, नए भारत की शिक्षा, आलेख साझा पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं।
महज 6 वर्ष की आयु में ही साहित्य में रुचि जागी
साहित्यकार एडीएम डॉक्टर सूरजसिंह नेगी बताते है कि महज 6 वर्ष की आयु में ही उनकी साहित्य में रुचि पड़ गई थी। जिसके बाद से ही उन्होंने कहानियां, नाटक, उपन्यास, आलेख लिखने प्रारम्भ कर दिए थे। डॉक्टर नेगी बताते हैं कि साहित्य लेखन में उनकी माँ ने उनका बहुत हौसला बढ़ाया। वे कहते हैं कि उनके द्वारा पिछले 40 सालों में कई किताबें, उपन्यास, किस्से कहानियां, आलेख लिखे गए और अब उनके द्वारा पाती लेखन विधा को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। पाती लेखन विधा अभियान में उन्हें उनकी पत्नी और बच्चों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।
डॉक्टर नेगी कहते हैं कि आज हम भले ही आधुनिकता की दौड़ में दौड़ हैं और ई मेल, इंस्टाग्राम, फेसबुक और वाट्सएप के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन पत्र लेखन में जो संवेदनाएं थीं वो संवेदनाएं आज इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म में नहीं हैं। आज भी पत्र लेखन के मध्यम से जो संवेदनाएं, अपनत्व, प्रेम और आपसी लगाव व्यक्त किया जा सकता है। उनके पाती लेखन विधा को आज के युवा वर्ग का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। यही वजह है कि अब तक उनके पास करीब 10 हजार से अधिक पत्र आ चुके हैं और उनके द्वारा इन पत्रों की छंटनी कर भावनात्मक, सुंदर, संवेदनाओं से भरे पत्रों को संकलित कर पुस्तक प्रकाशित की जा रही हैं। जिसमें इन अभी पत्रों को शामिल किया जा रहा है।
50 नाटक, कहानी, पुस्तकें, आलेख प्रकाशित
डॉ. सूरज सिंह नेगी द्वारा अपने प्रशासनिक कार्यों के साथ ही साहित्य के क्षेत्र में भी अतुल्यनीय कार्य किया जा रहा है। अब तक उनके करीब 50 से अभी लेख, आलेख, समीक्षा, संस्करण, उपन्यास, नाटक, कहानी आदि की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके सामाजिक, आर्थिक विषयों पर करीब दो दर्जन से अधिक निबंध और आलेख विभिन्न समाचार पत्र, अन्य प्रकाशन सामग्री में प्रकाशित हो चुके हैं। वहीं, दुर्योधन की प्रतिज्ञा, चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह, मास्टर जी नामक नाटक और नील कुमारी बाल उपन्यास अप्रकाशित हैं। जो जल्द ही प्रकाशित होने वाले हैं।
डॉ. नेगी ने बताया कि प्रशासनिक कार्य और साहित्य कार्य उनके लिए एक दूसरे के पूरक हैं। वे दैनिक डायरी लिखते हैं। प्रशासनिक कार्य करते समय जब भी उनके दिमाग में कुछ नई चीज आती है, तो वे उसे अपनी डायरी में लिख लेते हैं और फिर जैसे ही उन्हें समय मिलता है। वैसे ही उसे वो अपने साहित्य में ढालने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि उनका प्रशासनिक कार्य उनके साहित्य के लिए किसी भी तरह से बाधा नहीं है, बल्कि उनका प्रशासनिक कार्य उनके साहित्य के निखार में अहम रोल अदा करता है। डॉक्टर नेगी कहते हैं कि अगर आप में भावना, संवेदना, मानवता आदि गुण नहीं होंगे, तो आप प्रशासनिक कार्य भी सही ढंग से नहीं कर पाएंगे। प्रशासनिक कार्य के साथ साथ अपनी साहित्य के प्रति रुचि को भी जी खोलकर वह एन्जॉय करते हैं और हमेशा कुछ नया करने की कोशिश में लगे रहते हैं।
आलेखों पर 6 विश्वविद्यालयों में शोध कार्य चल रहा
नेगी द्वारा लिखित उपन्यास वसीयत और नियति चक्र पर लघु शोध हो चुके हैं। साथ ही उनके आलेखों पर 6 विश्वविद्यालयों में शोध कार्य चल रहा है। डॉक्टर सूरज सिंह नेगी अपने प्रशासनिक कार्य के साथ-साथ समाज को साहित्य के क्षेत्र में भी बहुत कुछ योगदान दे रहे हैं। लिखत उपन्यास, कहानियां, आलेख, सहित उनकी विभिन्न पुस्तकें समाज को साहित्य का नया भंडार और ज्ञान बांट रही हैं।