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Rajasthan: वीरांगनाओं का धरना जारी, CM गहलोत बोले- रिश्तेदार को नौकरी देंगे तो शहीदों के बच्चों का क्या होगा

Wed, 08 Mar 2023 09:13 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

सीएम अशोक गहलोत ने कहा, शहीदों के बच्चों का हक मारकर किसी अन्य रिश्तेदार को नौकरी देना कैसे उचित ठहराया जा सकता है! जब शहीद के बच्चे बालिग होंगे तो उन बच्चों का क्या होगा?  उनका हक मारना उचित है क्या? 
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सीएम अशोक गहलोत - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की वीरांगनाएं पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के घर के बाहर धरना दे रही हैं। बुधवार को होली के दिन भी इन वीरांगनाओं का धरना जारी रहा। इन वीरांगनाओं के साथ भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा भी धरने पर बैठे हुए हैं। सांसद मीणा का कहना है कि जब तक सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती है तब तक विरोध जारी रहेगा। 

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अब इस मामले को लेकर सीएम अशोक गहलोत ने भाजपा नेताओं पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, शहीदों के बच्चों का हक मारकर किसी अन्य रिश्तेदार को नौकरी देना कैसे उचित ठहराया जा सकता है! जब शहीद के बच्चे बालिग होंगे तो उन बच्चों का क्या होगा?  उनका हक मारना उचित है क्या?  

हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम शहीदों और उनके परिवारों का उच्चतम सम्मान करें। राजस्थान के हर नागरिक ने शहीदों के सम्मान का अपना कर्तव्य निभाता है, लेकिन भाजपा के कुछ नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए शहीदों की वीरांगनाओं का इस्तेमाल कर उनका अनादर कर रहे हैं। यह कभी भी राजस्थान की परंपरा नहीं रही है। मैं इसकी निंदा करता हूं।
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सीएम ने कहा, शहीद हेमराज मीणा की पत्नी उनकी तीसरी मूर्ति एक चौराहे पर स्थापित करवाना चाहती हैं जबकि पूर्व में शहीद की दो मूर्तियां राजकीय महाविद्यालय सांगोद के प्रांगण और उनके पैतृक गांव विनोद कलां स्थित पार्क में स्थापित की जा चुकी है। ऐसे में ये मांग अन्य शहीद परिवारों को दृष्टिगत रखते हुए उचित नहीं है। शहीद रोहिताश लांबा की पत्नी अपने देवर के लिए अनुकम्पा नियुक्ति मांग रही हैं। अगर शहीद लांबा के भाई को नौकरी दे दी जाती है तो आगे सभी वीरांगनाओं के परिजन-रिश्तेदार उनके और उनके बच्चे के हक की नौकरी अन्य परिजन को देने का अनुचित सामाजिक एवं पारिवारिक दबाव डालने लग सकते हैं।

क्या हमें वीरांगनाओं के सामने एक ऐसी मुश्किल परिस्थिति खड़ी करनी चाहिए, क्योंकि वर्तमान में बनाए गए नियम पूर्व के अनुभवों के आधार पर ही बनाए गए हैं। ऐसे में शहीदों के बच्चों का हक मारकर किसी अन्य रिश्तेदार को नौकरी देना कैसे उचित ठहराया जा सकता है? जब शहीद के बच्चे बालिग होंगे तो उन बच्चों का क्या होगा?  

सीएम ने कहा, साल 1999 में मुख्यमंत्री के रूप में मेरे पहले कार्यकाल के दौरान शहीदों के आश्रितों हेतु राज्य सरकार ने कारगिल पैकेज जारी किया। समय-समय पर इसमें बढ़ोत्तरी कर इसे और प्रभावशाली बनाया गया है। कारगिल पैकेज में शहीदों की पत्नी को पच्चीस लाख रुपये और 25 बीघा भूमि या हाउसिंग बोर्ड का मकान (भूमि या मकान ना लेने पर 25 लाख रुपये अतिरिक्त) मासिक आय योजना में शहीद के माता-पिता को 5 लाख रुपये सावधि जमा, एक सार्वजनिक स्थान का नामकरण शहीद के नाम पर एवं शहीद की पत्नी या उसके पुत्र-पुत्री को नौकरी दी जाती है। 

राजस्थान सरकार ने प्रावधान किया है कि यदि शहादत के वक्त वीरांगना गर्भवती है एवं वो नौकरी नहीं करना चाहे तो गर्भस्थ शिशु के लिए नौकरी सुरक्षित रखी जाएगी जिससे उसका भविष्य सुरक्षित हो सके। इस पैकेज के नियमानुसार पुलवामा शहीदों के आश्रितों को मदद दी जा चुकी है।

शहीद परिवारों के लिए ऐसा पैकेज संभवत: अन्य किसी राज्य में नहीं है। राजस्थान वीरों की भूमि है जहां के हजारों सैनिकों ने मातृभूमि के लिए अपना बलिदान दिया है। यहां की जनता एवं सरकार शहीदों का सबसे अधिक सम्मान करती है। कारगिल युद्ध के दौरान में स्वयं राजस्थान के 56 शहीदों के घर जाकर उनके परिवार के दुख में शामिल हुआ। ये मेरे भाव जो मैं आपके समक्ष रख रहा हूं। ये सभी विचार मैंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ भी साझा किए हैं।

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