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भाजपा सांसद ने पूर्व मंत्री जयराम के खिलाफ किया मानहानि का केस

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सिटी पैलेस के मालिकाना हक के मामले में बयानबाजी के संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के विरुद्ध धौलपुर की स्थानीय अदालत में मानहानि के संबंध में फौजदारी परिवाद पेश किया गया है।
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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र एवं झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह ने यह परिवाद पेश किया है। इसके अलावा अंग्रेजी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के एंकर अर्णव गोस्वामी के विरुद्ध भी मानहानि का फौजदारी परिवाद पेश किया है। इस मामले में अगली सुनवाई पांच अगस्त को होनी है।

झालावाड़ सांसद एवं सीएम वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह के अधिवक्ता गुलराज गोपाल खंडेलवाल, बीआर बाजवा तथा शरीफ खान ने बताया कि धौलपुर की एसीजेएम कोर्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश तथा अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ के एंकर अर्णव गोस्वामी के विरुद्ध दो अलग-अलग फौजदारी परिवाद पेश किए गए हैं।
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सिटी पैलेस का मामले में शिकायत

अधिवक्ता खंडेलवाल ने बताया कि दो फौजदारी परिवादों में आईपीसी की धारा 500 तथा 501 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई पांच अगस्त को होनी है।

अधिवक्ता खंडेलवाल ने आगे कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने दुष्यंत सिंह के पैतृक निवास सिटी पैलेस के मालिकाना हक के संबंध में गलत बयानी की थी। इसके अलावा अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ के एंकर अर्णव गोस्वामी ने टेलिविजन पर एक डिवेट के दौरान भी सिटी पैलेस के संबंध में मालिकाना हक पर सवाल उठाए थे।

राजे के पुत्र को उत्तराधिकार के रुप में मिला सिटी पैलेस
वसुंधरा राजे के पुत्र और झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह के अधिवक्ता गुलराज गोपाल खंडेलवाल एवं विधि सलाहकार अधिवक्ता अंबरीष श्रीवास्तव ने बताया कि सिटी पैलेस के मालिकाना हक के संबंध में यह साफ है कि वर्ष 1958 में केंद्र सरकार ने दुष्यंत सिंह के दादा उदयभान सिंह को दे दी। उसके बाद में उत्तराधिकारी के रूप में सिटी पैलेस अब दुष्यंत सिंह के नाम है।
 
खंडेलवाल एवं श्रीवास्तव ने बताया कि आजादी के बाद देशी रियासतों को समाप्त करने के बाद शासकों से उनकी संपत्ति रखे जाने के बारे में केंद्र सरकार ने जानकारी मांगी थी। इसमें रियासतों के राजाओं से यह सूची मांगी गई, कि वह कौन कौन सी संपत्ति एवं जायदाद अपने पास रखना चाहते हैं।
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दुष्यंत सिंह के अधिवक्ता एवं विधि सलाहकार ने दी जानकारी

तब धौलपुर रियासत के तत्कालीन शासकों की ओर से इन्वेंटरी लिस्ट अॅफ डाक्यूमेंट में शामिल केसरबाग के बदले में सिटी पैलेस को अपने पास में रखा गया था। इस प्रकार से केंद्र सरकार ने 22 नवंबर 1958 को एक एक्सचेंज डाक्यूमेंट के जरिये सिटी पैलेस को धौलपुर रियासत की संपत्ति के रूप में मान्यता दे दी।

इस डाक्यूमेंट को तत्कालीन अजमेर कमिश्नर ने बाकायदा अटेस्ट भी किया था। इस कवायद में केसरबाग के रक्षा मंत्रालय को दिए जाने के बाद में सिटी पैलेस धौलपुर राज परिवार का आधिकारिक एवं पैतृक निवास बन गया। खंडेलवाल एवं श्रीवास्तव ने बताया कि राजपरिवार की संपत्ति के निस्तारण की प्रक्रिया के बाद में 1978 में भतरपुर कोर्ट में एक केस चला।

हेमंतसिंह तथा उनके पुत्र दुष्यंत सिंह के बीच चले इस विवाद में वर्ष 2007 में राजीनामा हुआ। इसके मुताबिक दिल्ली के पंचशील मार्ग की संपत्ति को छोड़कर देश के किसी भी कोने में मौजूद संपत्ति दुष्यंत सिंह को मिली।

इस प्रकार कानूनी रुप से धौलपुर रियासत के राजा हेमंत सिंह के पुत्र दुष्यंत सिंह सिटी पैलेस समेत अन्य संपत्ति के वारिस बन गए। खंडेलवाल ने बताया कि इसी क्रम में 11 जून 2004 को सिटी पैलेस तथा उससे जुड़ी भूमि राजस्व रिकार्ड में राजा दुष्यंत सिंह के नाम दर्ज है।
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