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विश्व आदिवासी दिवस: बारिश भी नहीं रोक पाई आदिवासी अस्मिता का जश्न, दौसा में गरजे किरोड़ी मीणा

Sun, 09 Aug 2026 09:29 PM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

विश्व आदिवासी दिवस पर दौसा के नांगल प्यारीवास स्थित आदिवासी मीणा पंच अथाई में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। तेज बारिश के बावजूद राजस्थान और पड़ोसी राज्यों से लोग पारंपरिक वेशभूषा में समारोह में पहुंचे।
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दौसा मीना हाई कोर्ट में आदिवासी दिवस,
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विस्तार
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विश्व आदिवासी दिवस पर दौसा की धरती आदिवासी अस्मिता से सराबोर हो गई। नांगल प्यारीवास स्थित आदिवासी मीणा पंच अथाई में रविवार को उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि प्रकृति की बाधाएं भी संस्कृति के जश्न को रोक नहीं सकतीं।
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तेज बारिश के बावजूद सुबह 10 बजे से ही पंच अथाई खचाखच भर गया। राजस्थान के कोने-कोने और पड़ोसी राज्यों से आए हजारों आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-थाप के साथ जुटे। समारोह में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के जीवन-संघर्ष पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

'आज मैं जगत बाबा बन गया'
मंच से डॉ. किरोड़ी ने कहा कि आज मैं जगत बाबा बन गया हूं। मैं देख रहा हूं यहां जेन Z बड़ी ताद में हैं। उनको मैं बताना चाहता हूं कि ये मीणा हाईकोर्ट का नाम कैसे पड़ा। 
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मीणा हाईकोर्ट के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक प्रेमी-प्रेमिका ने मिलकर प्रेमिका के पति को मार डाला। पंचायत में 84 गांवों के लोग इकट्ठा हुए थे। फैसला आया तो जिसने हत्या की थी उसे काला करके गधे पर बैठा दिया। जिस महिला ने हत्या की उसको भी गधे की नकेल पकड़ाकर दे दिया और कहा- जाओ और थानेदार के गले में डाल देना।

उन्होंने 50 हजार लोगों के आंदोलन का किस्सा भी सुनाया कि इसी जगह से पंचों को छुड़ाने 50 हजार लोग दौसा कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़ रहे थे। थोड़ा आगे चले और पुलिस ने हमें 14 पंचों को लाकर सौंप दिया। मैं आज तक समझ नहीं पाया, पुलिस ने पंचों को लाकर हमें क्यों दिया। वो तो कह रहे थे हाईकोर्ट जाना पड़ेगा।  डॉ. मीणा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति हमारी पहचान है। इसे बचाना और आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है। 

नेताओं ने दिए संस्कार और शिक्षा के संदेश
लालसोट विधायक रामबिलास मीणा ने युवाओं से कहा कि आज का रील का दौर चल गया है। लोग रील बनाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। हमें पढ़ाई पर भी ध्यान देना होगा। 

कृषि मंत्री के भाई जगमोहन मीणा ने कहा कि ये जाति विशेष का स्थल नहीं है। ये सर्व समाज का स्थल है। ये मीणा हाईकोर्ट छोटा पड़ गया है। लोग अंदर भी हैं और बाहर भी हैं। इसका विस्तार करना होगा। यहां से ऐसे बच्चे निकाले जाएंगे जो समाज को आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने युवाओं से नशा न करने की अपील करते हुए कहा कि हमें संस्कारवान बनना है। समाज के साथ देश को भी आगे बढ़ाना है।  कार्यक्रम संयोजक जगमोहन मीणा और सह संयोजक धुंधीराम मीणा ने अतिथियों का साफा और माला पहनाकर सम्मान किया।

लोक कला और अभूतपूर्व इंतजाम
पूरा दिन पंच अथाई लोक गीत और नृत्य से गूंजता रहा। घूमर और कालबेलिया नृत्य पर दर्शक झूम उठे। हरियाणवी गायक की प्रस्तुतियों ने माहौल गर्म कर दिया। आदिवासी लोक गायक विष्णु मीणा और कानाराम की दंगल पार्टी ने पारंपरिक गीत गाए।

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आयोजकों ने एक लाख से ज्यादा लोगों के लिए व्यवस्था की थी। 4 पार्किंग, 2 विशाल डोम, 500 से अधिक पुलिसकर्मी और कंट्रोल रूम बनाया गया। भोजन के लिए करीब 100 हलवाई 3 दिन से जुटे थे। 800 किलो चीनी, 1500 किलो आटा, 80 पीपे घी की व्यवस्था की गई।
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आदिवासी दिवस कार्यक्रम के दौरान इस तरह निकला जुलूस।

 

आदिवासी दिवस कार्यक्रम में मौजूद बड़ी संख्या में जनसमूह।

 

आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में उपस्थित मातृ शक्तियां।

 

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