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बालाजी धाम का हवाई सपना क्यों टूटा?: ढोल-नगाड़ों से शुरू हुई सेवा पहली उड़ान के बाद बंद, जानिए वजह

Wed, 30 Sep 2026 09:26 AM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

मेहंदीपुर बालाजी धाम को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए आठ दिसंबर 2025 को हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई थी। पहली उड़ान में पांच श्रद्धालु पहुंचे, लेकिन इसके बाद सेवा नियमित नहीं हो सकी।
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दोसा स्थित मेंहदीपुर बालाजी हेलीपेड पर उतरता हेलीकॉप्टर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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दौसा जिले के विश्व प्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी धाम को हवाई मार्ग से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने का सपना फिलहाल हवा-हवाई हो गया है। 8 दिसंबर 2025 को ढोल-नगाड़ों के साथ शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा पहली उड़ान के बाद ही दम तोड़ गई। पहले दिन पांच श्रद्धालु हवाई मार्ग से धाम पहुंचे थे, इसके बाद हेलीपैड पर सन्नाटा पसर गया।
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11 बजे उतरा था हेलीकॉप्टर, माला पहनाकर किया था स्वागत
आठ दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे मीन भगवान मंदिर के पास बने हेलीपैड पर पहला हेलीकॉप्टर उतरा था। पिनान से उड़कर आए इस हेलीकॉप्टर में पांच श्रद्धालु सवार थे। हेलीपैड पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और सैकड़ों स्थानीय लोग मौजूद थे। श्रद्धालुओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। उस समय लगा था कि अब बालाजी धाम भी वैष्णो देवी और केदारनाथ की तरह हवाई नक्शे पर आ गया है। योजना के तहत मेहंदीपुर बालाजी के साथ-साथ आभानेरी की चांद बावड़ी, झाझीरामपुरा बालाजी और पपलाज माता मंदिर को भी हवाई सर्किट से जोड़ने की बात कही गई थी। कंपनी ने दावा किया था कि पिनान से बालाजी धाम मात्र 15 मिनट में, जबकि दिल्ली और जयपुर से 25-26 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।

किराया सुनकर उड़े होश
हेलीकॉप्टर सेवा का किराया आम भक्त की पहुंच से बाहर था। लोकल जॉय राइड के लिए 36 हजार रुपये, जबकि फूल वर्षा के साथ जॉय राइड के लिए 61 हजार रुपये तय किए गए थे। एक हेलीकॉप्टर में अधिकतम चार यात्री बैठ सकते थे। पिनान से बालाजी आने-जाने का किराया 1.21 लाख रुपये और दिल्ली से बालाजी आने-जाने का किराया 5.41 लाख रुपये रखा गया था। प्रत्येक लैंडिंग पर ग्राम पंचायत को 5 हजार रुपये की आय होनी थी।
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कंपनी बोली- गर्मी के कारण रोका, मौसम ठंडा होते ही फिर उड़ेंगे
सेवा बंद होने के बाद कंपनी के प्रतिनिधि मनीष कुमार ने तर्क दिया कि राजस्थान में अप्रैल से सितंबर तक तापमान 45 डिग्री से ऊपर रहता है। अधिक गर्मी में हेलीकॉप्टर संचालन में सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है। इसी वजह से सेवा को अस्थायी रूप से रोका गया है। कंपनी के अनुसार, मौसम अनुकूल होते ही दिल्ली, जयपुर और पिनान से सेवा दोबारा शुरू की जाएगी। श्रद्धालु वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।

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स्थानीय व्यापारियों की उम्मीद भी टूटी
हेलीकॉप्टर सेवा से स्थानीय व्यापारियों को बड़ी उम्मीद थी। दुकानदार कमलेश कुमार ने कहा कि उन्हें लगा था कि बड़े सेठ और वीआईपी लोग हवाई मार्ग से आएंगे। इससे होटल, धर्मशाला, प्रसाद और फूल-माला की बिक्री बढ़ेगी। लेकिन 5 लाख रुपये से अधिक का किराया सुनकर ही उत्साह ठंडा पड़ गया। उनका कहना है कि सेवा नियमित चलती तो स्थानीय कारोबार को जरूर फायदा होता। धर्मशाला मैनेजर राज कुमार शर्मा ने कहा कि पिनान से 15 मिनट में बालाजी पहुंचना आकर्षक था। पहले दिन काफी उत्साह था, लेकिन अब हेलीपैड पर सन्नाटा है। सरकार को चाहिए कि कम किराए में सेवा दोबारा शुरू कराए।

खाटूश्यामजी-सालासर की हेली सेवा का भी यही हाल
अकेले मेहंदीपुर बालाजी ही नहीं, खाटूश्यामजी और सालासर के लिए शुरू की गई हेली सेवा भी बंद है। अगस्त 2025 में दिल्ली से खाटूश्यामजी के लिए सेवा शुरू हुई थी। जालुण्ड हेलीपैड पर दो हेलीकॉप्टर उतरे थे, जिनमें कवि कुमार विश्वास सहित 12 लोगों ने दर्शन किए थे। यह सेवा भी कुछ उड़ानों के बाद बंद हो गई।
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पंच गौरव में शामिल है मेहंदीपुर बालाजी धाम
मेहंदीपुर बालाजी को राज्य सरकार ने पंच गौरव योजना में शामिल किया है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हवाई सेवा को अहम माना गया था। लेकिन हकीकत यह है कि जिस हेलीपैड पर पहले दिन जश्न का माहौल था, वहां अब नियमित उड़ान नहीं है। श्रद्धालु आज भी सड़क मार्ग से ही बालाजी धाम पहुंच रहे हैं। हवाई सेवा का सपना फिलहाल हवा-हवाई ही नजर आ रहा है।
 
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