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Dausa News: विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय पार्टियों के बीच आईआईटीयन उम्मीदवार भी, जानिए क्या है रणनीति?

Wed, 06 Nov 2024 08:04 PM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

विप्र ने हर किसान और ग्रामीण परिवार के लिए घर-घर और खेत-खेत में बारहमासी पानी, बिजली की व्यवस्था, क्षेत्र में फैक्ट्रियों की स्थापना और हर दो परिवारों में से पांच लोगों को रोजगार देने की अपनी कार्यनीति के बारे में बताया।
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राजस्थान उपचुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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,दौसा जिले में विधानसभा उपचुनाव में कई उम्मीदवार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। इन सभी के बीच एक ऐसा उम्मीदवार भी है जो आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई कर कई वर्षों से जिले की उन्नति के लिए किसानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस बार उन्होंने अचानक चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। 
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चुनावी रण में उतरे दौसा जिले की पैतृक भूमि से ताल्लुक रखने वाले विप्र गोयल ने  बुधवार को दौसा की सब्जी मंडी, होदायली, धर्मपुरा, बड़ौली, रामबास, तीतरवाड़ा, पिलवा, माली ढाणी, काबलेशर, बिशनपुरा, अखैपुरा, दादंका और चौरड़ी ग्राम पंचायतों का दौरा किया। इन जगहों पर स्थानीय लोगों ने विप्र का फूलमालाओं और साफा पहनाकर स्वागत किया। विप्र ने लोगों की समस्याओं को सुना, जिनमें पानी, बिजली, रोजगार और मवेशियों के चारे जैसी समस्याएं मुख्य रूप से शामिल थीं।

विप्र ने हर किसान और ग्रामीण परिवार के लिए घर-घर और खेत-खेत में बारहमासी पानी, बिजली की व्यवस्था, क्षेत्र में फैक्ट्रियों की स्थापना और हर दो परिवारों में से पांच लोगों को रोजगार देने की अपनी कार्यनीति के बारे में बताया।
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अगले तीन वर्षों में योजनाएं
विप्र की योजना है कि अगले तीन वर्षों में दौसा क्षेत्र के हर परिवार को बारहमासी पानी, बिजली और रोजगार की व्यवस्था मिले। उनकी कार्यनीति में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं:

शून्य लागत पर पानी की व्यवस्था - किसान के खेत-खेत में पानी की सतत व्यवस्था के लिए सोलर पंप लगाए जाएं, ताकि फसल की उपज के साथ-साथ उसे सही दामों में बेचा भी जा सके।
फ़ूड प्रोसेसिंग संयंत्र - 10,000 किसान और पशुपालकों के बीच एक फ़ूड प्रोसेसिंग संयंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें एक दूध प्रसंस्करण संयंत्र और बायोगैस-बायोखाद संयंत्र भी शामिल हों।
रोजगार सृजन - प्रत्येक किसान और पशुपालक परिवार में दो वयस्कों के लिए स्थानीय रोजगार की व्यवस्था हो। कस्बाई और शहरी युवाओं के लिए कारखानों की स्थापना और रोजगार की व्यवस्था की जाए।
चुनाव में उतरने का कारण

जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को लागू करने में शासन और प्रशासन की ओर से आ रही चुनौतियों और देरी के कारण विप्र ने यह निर्णय लिया कि इन कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए उनका शासन में आना जरूरी है। इसलिए उन्होंने दौसा विधानसभा के उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की है।

दौसा विधानसभा एक सामान्य सीट है और गोयल भी सामान्य वर्ग से आते हैं, जिससे उन्हें लाभ मिलने की संभावना है। चूंकि विप्र कई वर्षों से किसानों के साथ काम कर रहे हैं और राजनीति से परे रहे हैं, उन्हें किसानों का समर्थन मिल रहा है, जिससे दोनों ही बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है।
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