जिले में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के चलते जहां सरकारी और निजी स्कूलों में शीतकालीन अवकाश चल रहा है, वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों को अब तक कोई छुट्टी नहीं दी गई है। इसका सीधा असर 3 से 6 वर्ष तक के छोटे बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें ठिठुरती सर्दी में रोज आंगनबाड़ी केंद्रों तक आना पड़ रहा है। सरकार की ओर से इन नन्हे बच्चों को राहत देने के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किए गए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक तय किया गया है। विभाग ने केंद्रों पर आने वाले बच्चों को पोषण और शाला-पूर्व शिक्षा देना अनिवार्य कर रखा है। इसी वजह से सर्द मौसम के बावजूद बच्चे केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। ठंड के इस मौसम में सरकार की नीतियों में विरोधाभास साफ नजर आ रहा है, जिससे छोटे बच्चे और उनके अभिभावक परेशान हैं।
एक ओर शिक्षा विभाग ने शीतलहर को देखते हुए सरकारी और निजी स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित कर दिया है, वहीं दूसरी ओर महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में न तो छुट्टी घोषित की गई है और न ही समय में कोई बदलाव किया गया है। इसका असर सीधे 3 से 6 वर्ष के बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें कड़ाके की ठंड में भी घर से बाहर निकलना पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में यदि कोई स्कूल खुला पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके विपरीत आंगनबाड़ी केंद्रों में, जहां पोषाहार के साथ-साथ प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है, वहां सर्दी के दिनों में कोई विशेष राहत व्यवस्था लागू नहीं की गई है।
पढ़ें; श्रीगंगानगर में पुलिस-बीएसएफ की बड़ी कार्रवाई, 20 करोड़ की हेरोइन जब्त; ड्रोन के जरिए लाई गई थी
जब सर्दी के इस दौर में आम लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है, तब छोटे-छोटे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूलों में 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए कोई राहत का आदेश जारी नहीं किया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक तेज प्रकाश अग्निहोत्री का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 365 में से करीब 300 दिन बच्चों को पोषण दिया जाना जरूरी है। बच्चों की उपस्थिति से ही पोषण सही तरीके से दिया जा सकता है, इसलिए केंद्रों की छुट्टी नहीं की जा सकती।
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत कुल 1379 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें 38 हजार से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों पर बच्चों को स्वास्थ्य, स्वच्छता, रंगों की पहचान, संख्या ज्ञान, पढ़ना-लिखना और बौद्धिक विकास से जुड़ी गतिविधियां कराई जाती हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पूरक पोषण दिया जाता है। इसके साथ ही टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी माताओं और समुदाय को दी जाती है।