बाढ़ से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद
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दौसा जिले के लालसोट उपखंड क्षेत्र के काकरिया गांव में मोरेल नदी पर सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2009 में निर्मित एनीकट शनिवार को तेज बहाव सहन नहीं कर पाया और टूट गया। एनीकट टूटते ही नदी का पानी तेजी से खेतों की ओर बह निकला, जिससे देखते ही देखते किसानों की सैकड़ों बीघा भूमि पर खड़ी फसलें तबाह हो गईं। तेज बहाव में धान, बाजरा और अन्य खरीफ की फसलें बहकर पूरी तरह बर्बाद हो गईं।
‘मरम्मत और देखरेख की अनदेखी’
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंच गए और भारी रोष जताया। किसानों का कहना है कि एनीकट की नियमित मरम्मत और समय-समय पर देखरेख की जाती तो यह हादसा नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग ने समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए, जिसके चलते भारी नुकसान हुआ। किसानों का कहना है कि अगर विभाग पानी रोकने और सुरक्षा प्रबंध करता, तो फसलें बच सकती थीं।
सरकारी सहायता और मुआवजे की मांग
किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके नुकसान का तुरंत सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई बिना सरकारी मदद के संभव नहीं है, क्योंकि सैकड़ों बीघा में फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं।
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‘पानी के दबाव से टूटा एनीकट’
इस संबंध में कनिष्ठ अभियंता अंकित मीणा ने बताया कि एनीकट का निर्माण वर्ष 2009 में नरेगा योजना के तहत कराया गया था। हाल ही में मोरेल नदी में आए तेज बहाव और पानी के अत्यधिक दबाव के कारण एनीकट की साइड दीवार टूट गई। इसके चलते कई गांवों से होकर पानी निकला, जिससे खेतों की मिट्टी कट गई और फसलें जलमग्न होकर खराब हो गईं।
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