दौसा रेलवे लाइन पर अंडरपास बनाने की मांग
रेल प्रशासन ने जिले में होकर गुजर रहे मुख्य रेल ट्रैक की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैक के दोनों ओर सीमेंट की पक्की दीवारों का निर्माण शुरू कर दिया है। लोहे के सरियों से मजबूत की जा रही ये दीवारें 5 से 6 फीट ऊंचाई तक बनाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य पशुओं और राहगीरों को ट्रैक पर आने से रोकना, ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाना और रेलवे भूमि के अतिक्रमण पर नियंत्रण करना है।
रेल सूत्रों के अनुसार बस्सी से अलवर तक करीब 120 किलोमीटर रूट में स्थित गांवों और शहरी इलाकों के बीच लगभग 15 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई जा रही है। इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और बांदीकुई, बसवा, दौसा, बस्सी और अलवर में युद्धस्तर पर काम चल रहा है।
कॉलोनियों के रास्ते बंद, परेशानी बढ़ी
शहरी क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक के दोनों ओर बसी कॉलोनियों के रास्ते दीवार बनने के बाद बंद हो गए हैं। इससे एक कॉलोनी से दूसरी कॉलोनी में आवागमन बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने दूध लाने, बाजार जाने और श्मशान घाट पहुंचने में परेशानी की बात कही है। लोगों ने वैकल्पिक मार्ग खोलने की अपील की लेकिन रेलवे प्रशासन ने मांग को मंजूरी नहीं दी है।
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दौसा रेलवे जंक्शन के पूर्वी हिस्से में कॉलोनियों का संपर्क दीवार बनने के बाद कट गया है। गुरुवार को प्रभावित कॉलोनियों के लोगों ने एडीएम अरविंद शर्मा को ज्ञापन सौंपकर ओवरब्रिज और अंडरपास बनाने की मांग उठाई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पैदल बाजार जाने के लिए करीब 200 मीटर तक रेलवे परिसर से गुजरना पड़ता है, जबकि वाहनों को लगभग 3 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है। इससे समय व ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।
लोगों ने बताया कि रेलवे लाइन पार करते समय महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है।
दौसा रेलवे लाइन पर अंडरपास बनाने की मांग