राजस्थान के दौसा जिले में वर्ष 1996 में हुई भीषण बस बम विस्फोट की घटना, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी, उससे जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मौत की सजा पाए दोषी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा रद्द करते हुए उसके खिलाफ नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि मामले की सुनवाई के दौरान उसे प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल सकी थी। इसके साथ ही उम्रकैद की सजा काट रहे एक अन्य दोषी को बरी कर दिया गया, जबकि राजस्थान सरकार की ओर से छह आरोपियों के बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने नए ट्रायल का दिया आदेश
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने वर्ष 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अब्दुल हमीद की मौत की सजा बरकरार रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब्दुल हमीद को मुकदमे के दौरान प्रभावी कानूनी सहायता (इफेक्टिव लीगल असिस्टेंस) नहीं मिली थी। इसी आधार पर अदालत ने उसके खिलाफ नए सिरे से ट्रायल कराने का आदेश दिया।
एक साल में ट्रायल पूरा करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई 1996 को हुए इस विस्फोट को लगभग तीन दशक पुराना मामला बताते हुए निर्देश दिया कि राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एक नामित अदालत में इस मामले की दोबारा सुनवाई सुनिश्चित करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रयास किया जाए कि नए ट्रायल की प्रक्रिया एक वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाए।
पसंद का वकील रखने की मिलेगी अनुमति
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पेशे से डॉक्टर अब्दुल हमीद को अपनी पसंद का वकील रखने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही नए ट्रायल की सुनवाई ऐसे वरिष्ठ न्यायाधीश करेंगे, जिन्हें सत्र न्यायालय के मुकदमों की सुनवाई का पर्याप्त अनुभव हो।
उम्रकैद पाए पप्पू उर्फ सलीम को किया बरी
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से उम्रकैद की सजा पाए पप्पू उर्फ सलीम को भी बरी कर दिया। साथ ही राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया, जिनमें छह आरोपियों को बरी किया गया था।
हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी मौत की सजा
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अब्दुल हमीद को बस में बम रखने का मुख्य आरोपी मानते हुए उसकी मौत की सजा बरकरार रखी थी। वहीं, पप्पू उर्फ सलीम की उम्रकैद की सजा भी यह कहते हुए कायम रखी गई थी कि उसने विस्फोट में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक उपलब्ध कराए थे।
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फांसी पर रोक
2 दिसंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल हमीद की फांसी की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। इससे पहले 22 जुलाई 2019 को राजस्थान हाईकोर्ट ने छह आरोपियों जम्मू-कश्मीर के जावेद खान, लतीफ अहमद, मोहम्मद अली भट्ट, मिर्जा निस्सा हुसैन, अब्दुल गनी तथा आगरा निवासी रईस बेग को बरी कर दिया था। इसके अलावा हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में बांदीकुई अदालत द्वारा फारुख अहमद खान को दी गई बरी किए जाने की राहत को भी बरकरार रखा था। राजस्थान सरकार ने फारुख अहमद खान की रिहाई के खिलाफ भी अपील दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया था।
जयपुर एसएमएस स्टेडियम बम प्रकरण में भी आरोपी रहा है अब्दुल हमीद
अब्दुल हमीद पर 26 जनवरी 1996 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में बम लगाए जाने के मामले में भी प्रमुख आरोपी होने का आरोप लगाया गया था।